झुंझुनू

Jhunjhunu News: ऐतिहासिक स्मेल्टर चिमनी बचाने की मांग, सीएम को भेजा ज्ञापन, ‘औद्योगिक धरोहर घोषित करें’

Smelter Chimney: खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स की ऐतिहासिक स्मेल्टर चिमनी को बचाने की मांग तेज हो गई है। इसे औद्योगिक धरोहर घोषित करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजा गया है।

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Mar 29, 2026
फाइल फोटो- पत्रिका

झुंझुनूं। झुंझुनूं जिले के खेतड़ी नगर स्थित ऐतिहासिक खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स की स्मेल्टर चिमनी को बचाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार पांडे ने इसे क्षेत्र की पहचान और औद्योगिक विरासत बताते हुए संरक्षण की मांग उठाई है।

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उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण

ज्ञापन में बताया गया कि खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स की स्थापना 1970 के दशक में देश में तांबा उत्पादन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 1974-75 के दौरान स्थापित स्मेल्टर संयंत्र के साथ इस विशाल चिमनी का निर्माण हुआ, जो उस समय की उन्नत तकनीक और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण रही है। करीब 375 फीट ऊंची यह चिमनी न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे क्षेत्र की पहचान और गौरव का प्रतीक भी माना जाता है।

खेतड़ी नगर को नया नाम मिला

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि एक समय यह चिमनी क्षेत्र की प्रगति, रोजगार और खुशहाली का प्रतीक थी। हजारों लोगों को रोजगार मिला और खेतड़ी नगर को “मिनी चंडीगढ़” के रूप में पहचान मिली। हालांकि वर्ष 2008 के आसपास विभिन्न इकाइयों के बंद होने के बाद क्षेत्र की स्थिति प्रभावित हुई और अब यह ऐतिहासिक चिमनी ही प्रमुख पहचान के रूप में शेष है।

वर्तमान में स्मेल्टर प्लांट को ध्वस्त करने के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसमें इस चिमनी को भी हटाने की आशंका जताई गई है। इसे लेकर क्षेत्र के नागरिकों, पूर्व कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों में चिंता और आक्रोश है।

औद्योगिक धरोहर घोषित करने की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि इस चिमनी को औद्योगिक धरोहर घोषित किया जाए और इसे गिराने या क्षतिग्रस्त करने पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही इसे खेतड़ी नगर के औद्योगिक इतिहास के प्रतीक के रूप में विकसित करने और औद्योगिक पर्यटन के रूप में बढ़ावा देने की भी मांग रखी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकें।

इसके अलावा राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के संयुक्त प्रयास से इसके संरक्षण और विकास की योजना बनाने की अपील की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यह केवल एक संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास, सम्मान और जनभावनाओं से जुड़ी धरोहर है, जिसे बचाना जरूरी है।

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