झुंझुनू

Rajasthan : झुंझुनूं के इस्लामपुर गांव का नाम होगा श्रीरामपुर!, प्रस्ताव से लोग बेचैन, 15 जून को करेंगे पैदल मार्च

Jhunjhunu News : झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायत इस्लामपुर का नाम बदलकर 'श्रीरामपुर' करने के प्रस्ताव ने यहां के लोगों को बेचैन कर दिया है। विरोध में 15 जून को पैदल मार्च करेंगे।

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Jhunjhunu Islampur Gaon renamed Shrirampur People uneasy proposal 15 June padal march
Rajasthan : गांव में आज भी ऐतिहासिक चौपाल मौजूद है जहां गांव वाले फैसला लेते थे व गांव का माइलस्टोन (इनसेट)। फोटो पत्रिका

Jhunjhunu News : गांव का नाम केवल एक शब्द नहीं होता, वह पीढ़ियों की यादों, इतिहास और पहचान का हिस्सा होता है। झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायत इस्लामपुर इन दिनों कुछ ऐसी ही भावनात्मक उथल-पुथल से गुजर रही है। गांव का नाम बदलकर 'श्रीरामपुर' करने के प्रस्ताव ने यहां के लोगों को बेचैन कर दिया है। उनका कहना है कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि चार सौ साल पुरानी विरासत और पहचान के अस्तित्व का प्रश्न है। करीब 158 15 हजार आबादी वाला इस्लामपुर जिले का सबसे बड़ा राजस्व गांव माना जाता है।

झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायत इस्लामपुर के ग्रामीण बताते हैं कि गांव की स्थापना 16वीं सदी में हुई थी और तब से यह क्षेत्र सामाजिक सौहार्द, देशभक्ति और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक रहा है। गांव में निवास करने वाले पठान परिवार खुद को महाराणा प्रताप के वीर सेनापति हकीम खां सूरी का वंशज मानते हैं। यही वजह है कि गांव के लोग अपनी पहचान को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और राष्ट्रीय विरासत से जोड़कर देखते हैं।

बिखरी हुई हैं देशसेवा की कहानियां

इस्लामपुर की गलियों में देशसेवा की अनेक कहानियां बिखरी हुई हैं। कर्नल अब्दुल रसूल खान को व 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में शौर्य के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया। उनके पुत्र कर्नल नसीम हैदर भी सेना से सेवानिवृत्त हुए। अब्दुल रऊफ वायुसेना में हैं।

15 जून को पैदल मार्च

नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों की ओर से 15 जून को गांव से कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। शुक्रवार को गांव में प्रशासक आमीन मनियार की मौजूदगी में बैठक हुई। नाम परिवर्तन के प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों ने कलक्टर को ज्ञापन भी सौंपा है। दामोदर मेघवाल, शैलेष भारती, दिनेश बरवड़ आदि ने बताया कि गांव का नाम किसी भी हालत में नहीं बदला जाना चाहिए।

सद्भाव की परंपरा कायम

यहां हिन्दू-मुस्लिम स‌द्भाव की परंपरा कायम है। गांव बसाया गया था, तब मस्जिद के साथ मंदिर भी स्थापित किया गया था। सूफी संत हजरत इरादतुल्लाह शाह साहब की दरगाह सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जहां सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं।

400 साल पुरानी विरासत पर खतरा

गांव का नाम बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे हमारी 400 साल पुरानी विरासत पर खतरा मंडराएगा।
मोहम्मद इब्राहीम खान, सचिव, अंजुमन अल पठान

Published on:
13 Jun 2026 11:53 am