
Rajasthan Sarpanch Election 2026: पंचायती राज चुनाव में झुंझुनूं जिले की बेटियों और बहुओं ने दूसरे गांवों में भी अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है। जिले के अलग-अलग गांवों से ससुराल गई महिलाओं ने सीकर और कोटपूतली क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सरपंच का चुनाव जीतकर अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। वहीं, जिले की ही किठाना ग्राम पंचायत में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के भतीजे की बहू सुभीता धनखड़ ने लगातार दूसरी बार सरपंच बनकर अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी है। इन जीतों के बाद कहीं पीहर में जश्न मना तो कहीं ग्रामीणों ने नवनिर्वाचित सरपंचों का जोरदार स्वागत किया।
इधर, सुलताना क्षेत्र की किठाना ग्राम पंचायत में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के भतीजे की बहू सुभीता धनखड़ ने लगातार दूसरी बार सरपंच पद पर जीत हासिल की है। लगातार दूसरी जीत के बाद गांव में उत्साह का माहौल रहा। ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। दूसरी बार जीत दर्ज करना उनके लिए गांव में राजनीतिक समर्थन और भरोसे को बरकरार रखने के रूप में देखा जा रहा है।
खेतड़ी उपखंड के टीबा बसई गांव की बेटी रीना देवी पुत्री जयदयाल ढीकवाल ने कोटपूतली पंचायत समिति की हांसियावास ग्राम पंचायत में सरपंच पद पर जीत दर्ज की। रीना देवी के भाई विक्रम ढीकवाल ने बताया कि उनकी जीत की सूचना मिलते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। छोटे से परिवार से निकलकर सरपंच पद तक पहुंचने वाली रीना की सफलता को गांव के लोग परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव की बात मान रहे हैं।
पचलंगी के तेजाजी नगर स्थित ढाणी स्वामी वाला निवासी अनीता बड़सरा ने सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र की समर्थपुरा सुजाना ग्राम पंचायत में सरपंच का चुनाव जीत लिया। शुक्रवार को घोषित परिणाम में अनीता ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 334 मतों से पराजित किया। उनकी जीत की खबर मिलते ही पीहर पचलंगी के तेजाजी नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। अनीता के पिता गुलझारी लाल बड़सरा सेना से सेवानिवृत्त हैं।
पंचायत चुनाव में एक-एक वोट की अहमियत एक बार फिर सामने आई है। पिलानी पंचायत समिति क्षेत्र की 26 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए हुए चुनाव में बड़ी संख्या में मतपत्र निरस्त होने से कई जगह हार-जीत के अंतर को लेकर चर्चा छिड़ गई है। शुक्रवार देर रात हुई मतगणना में कुल 1,614 मत अवैध घोषित किए गए। यह कुल पड़े मतों का करीब 2.22 प्रतिशत है। कई ग्राम पंचायतों में निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर के बराबर या उससे अधिक रही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि ये मत वैध होते तो क्या कुछ पंचायतों के चुनाव परिणाम अलग हो सकते थे?
हालांकि, निरस्त मतों के आधार पर यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि परिणाम बदल जाता, लेकिन कम अंतर से हार-जीत वाले मुकाबलों में इनकी संख्या ने चर्चा जरूर बढ़ा दी है। पंचायत चुनाव में मतदाताओं ने बैलेट पेपर के माध्यम से अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के दौरान निर्धारित तरीके से मुहर नहीं लगाने, एक से अधिक स्थानों पर निशान लगाने अथवा मतपत्र पर गलत तरीके से मतदान करने के कारण कुछ मत निरस्त हुए। मतपत्र पर मतदान की प्रक्रिया में छोटी-सी चूक भी वोट को अवैध बना सकती है। ऐसे में मतदान प्रक्रिया की जानकारी का अभाव भी कुछ मतदाताओं के लिए परेशानी का कारण बना होगा। हालांकि, निरस्त मतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए निर्वाचन संबंधी विस्तृत आंकड़ों की जरूरत होगी।
बैलेट पेपर से मतदान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मतदान मशीन से होता तो क्या निरस्त मतों की संख्या कम रहती और कुछ परिणाम बदल सकते थे? मशीन आधारित मतदान में मतपत्र पर गलत जगह मुहर लगाने जैसी गलती की गुंजाइश नहीं रहती, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी निरस्त मत बच जाते या चुनाव परिणाम निश्चित रूप से बदल जाते।
पिलानी पंचायत समिति क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों के आंकड़े खास ध्यान खींचते हैं। देवरोड़ में 142 मत निरस्त हुए, जबकि जीत का अंतर 144 मतों का रहा। यहां निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर से महज दो कम है। पीपली में 49 मत निरस्त हुए, जबकि जीत का अंतर केवल 14 वोट रहा। झेरली में 103 मत अवैध घोषित किए गए, जबकि जीत का अंतर 70 मतों का था। इसी तरह जखोड़ा में 104 मत निरस्त हुए, जबकि जीत का अंतर 52 वोट रहा। तिगियास ग्राम पंचायत में भी 71 मत निरस्त किए गए, जबकि जीत का अंतर 59 वोटों का रहा। इन पंचायतों में निरस्त मतों की संख्या और जीत के अंतर के बीच का फर्क चुनावी मुकाबले की अहमियत को रेखांकित करता है। बजावा और दूदवा में भी निरस्त मतों की संख्या को लेकर चर्चा है। इन आंकड़ों से यह जरूर स्पष्ट होता है कि कम अंतर वाले मुकाबलों में हर मत की अहमियत कितनी अधिक होती है।
पंचायत समिति क्षेत्र में कुल 88,089 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 72,552 मतदाताओं ने मतदान किया। इस प्रकार कुल पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 82.36 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान करने वालों में से 1,614 मत निरस्त हुए, जो कुल पड़े मतों का करीब 2.22 प्रतिशत है। वहीं, कुल पंजीकृत मतदाताओं के मुकाबले निरस्त मतों का अनुपात करीब 1.83 प्रतिशत रहा।
प्रतिशत के लिहाज से निरस्त मतों की संख्या कम दिखाई दे सकती है, लेकिन पंचायत चुनाव में जहां प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर कुछ दर्जन मतों तक सिमट जाता है, वहां ऐसे आंकड़े महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यही कारण है कि मतगणना के बाद कई ग्राम पंचायतों में निरस्त मतों और जीत के अंतर की तुलना चर्चा का विषय बनी हुई है।