झुंझुनू

राजस्थान का बहादुर बेटा 5 गोलियां लगने के बाद भी आतंकियों से लड़ता रहा, 2 को मार गिराया; अंत में हुआ शहीद

राजस्थान में झुंझुनूं जिले के लाल सूबेदार राजेंद्र प्रसाद भांभू ने 11 अगस्त 2022 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी में अदम्य साहस का परिचय दिया। पांच गोलियां लगने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे मोर्चे पर डटे रहे तथा दो आतंकियों को ढेर कर वीरगति को प्राप्त हुए।
2 min read
Aug 15, 2026
martyr rajendra bhambu
शहीद राजेंद्र प्रसाद भांबू (पत्रिका फोटो)

Subedar Rajendra Prasad Bhambhu: झुंझुनूं: वीरभूमि झुंझुनूं की माटी ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अनेक वीर सपूत दिए हैं। बगड़ क्षेत्र के मालीगांव की धरती भी ऐसे ही अमर शहीद की वीरगाथा अपने भीतर समेटे है। यहां जन्मे सूबेदार राजेंद्र प्रसाद भांबू ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया और सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गए। उनका जीवन देशसेवा, साहस और समर्पण की मिसाल है।

पांच गोलियां लगीं, फिर भी डटे रहे

11 अगस्त 2022 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में आतंकियों के साथ भीषण मुठभेड़ हुई। रात करीब 2.30 बजे से सुबह 5.30 बजे तक चले ऑपरेशन में गोलियों की बौछार के बीच सूबेदार राजेंद्र प्रसाद भांबू मोर्चे पर डटे रहे। मुठभेड़ के दौरान उन्हें पांच गोलियां लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्होंने दोनों आतंकियों को मार गिराया। देश की रक्षा करते हुए अंततः वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनका यह बलिदान आज भी क्षेत्र के युवाओं और देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कारगिल युद्ध में भी निभाई अहम भूमिका

शहीद राजेंद्र प्रसाद भांबू का सैन्य जीवन उपलब्धियों और देशसेवा से भरा रहा। उन्होंने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भी अपनी यूनिट के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने उत्तरी एवं दक्षिणी सूडान में करीब एक वर्ष तक संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय सेवा भी दी।

उनकी सैन्य सेवाओं के दौरान उन्हें हाई एल्टीट्यूड अवॉर्ड, सियाचिन ग्लेशियर मेडल, ऑपरेशन विजय स्टार, ऑपरेशन विजय मेडल, नौ वर्ष लंबी सेवा पदक, सैन्य सेवा पदक (क्लैप एनईएफए), ऑपरेशन पराक्रम पदक, संयुक्त राष्ट्र पदक, वीएसएम विद क्लैप सूडान और 20 वर्ष सेवा पदक सहित विभिन्न सम्मान प्राप्त हुए।

पिता भी रहे थे सेना में

राजेंद्र प्रसाद भांबू को देश सेवा और सैन्य जीवन की प्रेरणा परिवार से मिली। उनके पिता बदरू राम भांबू जाट रेजीमेंट में सेवाएं दे चुके थे और उन्होंने वर्ष 1965 एवं 1971 के भारत-पाक युद्धों में भी वीरता के साथ भाग लिया था। इस परिवार की पीढ़ियों में देशसेवा और बलिदान की भावना रही है।

शहीद सूबेदार राजेंद्र प्रसाद भांबू अपने पीछे पत्नी तारामणि देवी, दो पुत्रियां प्रिया और साक्षी तथा पुत्र अंशुल भांबू को छोड़ गए। उनके छोटे भाई राजेश भांबू, जो शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, परिवार की जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ निभा रहे हैं।

गांव में स्थापित की गई प्रतिमा

शहीद की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके पैतृक गांव मालीगांव में विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा का अनावरण मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने किया था। इस अवसर पर गांव की मुख्य सड़क से शहीद के घर एवं प्रतिमा स्थल तक सड़क निर्माण का वादा भी किया गया था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार यह कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। शहीद के सम्मान से जुड़े इस मार्ग के निर्माण की मांग आज भी कायम है।

Updated on:
15 Aug 2026 02:04 pm
Published on:
15 Aug 2026 02:04 pm