
जोधपुर . नवरात्र के पहले दिन 2008 में भगदड़ मचने से 216 लोगों की मौत हुई। पुलिस ने एक मर्ग दर्ज किया, किसी की कोई अन्य रिपोर्ट नहीं ली। सरकार ने जांच के लिए जस्टिस जसराज चोपड़ा का अयोग बनाया। हादसे के बाद तत्कालीन एसपी-कलक्टर के तबादले किए गए। इसके बाद आयोग की कारवाई लगभग 1500 दिन चली, 222 पीडि़तों और 59 अफसरों के बयान लिए। प्रदेश के सभी मंदिरों का दौरा किया। यात्राओं पर 3.23 लाख, वेतन पर 105.27लाख, चिकित्सा पर 1.75लाख, गाडिय़ों के किराए पर 18.60 लाख और रॉयल्टी के 32.93 लाख मिलाकर कुल दो करोड़ रुपए खर्च हुए।
- सरकार ने आज दिन तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की और न ही किसी की जिम्मेदारी तय हुई।
- पुलिस का मर्ग भी पेडिंग है। पुलिस के अनुसार चोपड़ा आयोग की रिपोर्ट पर ही पुलिस की जांच रिपोर्ट तय होगी।
मारवाड़ ने झेले हैं ये तीन बड़े मामले भी
जोधपुर. मेहरानगढ़ हादसे के अलावा भी मारवाड़ ने तीन और बड़े हादसे झेले हैं। इन तीनों घटनाओं में 125 लोगों की जान चली गई थी। यह बात दीगर है कि इन तीनों घटनाओं में भी सरकारी तंत्र की ढीलाई सामने आई। किसी में दोषी छूट गए, तो किसी में दोषी साबित नहीं हुए।
हादसा-1
संक्रमित ग्लूकोज से 22 प्रसूतांए मरी
- 3 डॉक्टर संस्पेड
- जांच के बाद सभी बहाल
उम्मेद अस्पताल में फरवरी 2011 में संक्रमित ग्लूकोज चढऩे से 22 प्रसूताओं की मौत हो गई। विधानसभा तक हंगामा व चिंता जताई गई। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की माइक्रोबॉयलेजी लैब मे ंपेरेंटल सर्जिकल कंपनी के इस ग्लूकोज की जांच हुई, तो कहा यह संक्रमित है। तत्काल अस्पताल के तीन डॉक्टर, औषधि नियंत्रक स्टोर प्रभारी व कर्मचारियों को संस्पेड कर दिया। केंद्र व राज्य सरकार की टीमों ने जांच कर गायनी विभागध्यक्ष को भी संस्पेंड किया। कॉलेज प्रबंधन की ओर से मुकदमें दर्ज हो गए।
नतीजा - कोलकाता की लैब में हुई जांच में ग्लूकोज को सही बताया। सभी आरोपी बहाल, दवा कंपनी के खिलाफ भी कारवाई नहीं।
हादसा- 2
जहरीली शराब से 22 की मौत
लूणी के शराब माफिया की स्प्रिट से जोधपुर और पाली में जहरीली शराब पीने से 2011 में 22 लोगों की मौत हुई। मुख्यमंत्री पीडि़तों से मिलने आए। आबकारी आयुक्त को जांच के लिए भेजा। पुलिस ने आरोपी कालूराम के घर अवैध डिस्टलरी पकड़ी और एक करोड़ रुपए कैश भी जब्त किए। आबकारी अफसरों व बासनी के थानाधिकारी सस्पेंड किया गया जो एक साल से ज्यादा सस्पेंड रहने के बाद थानाधिकारी बन गए। सरकार ने उसी वक्त नियम बनाया कि जहां भी जहरीली शराब से मौतें होंगी वहां के थानाधिकारी व जिला आबकारी अधिकारी व प्रवर्तन निरिक्षक के खिलाफ भी क्रिमिनल केस होगा। लेकिन यह नियम लागू ही नहीं हो पाया।
नतीजा - कोर्ट में सबूतों के अभाव में मुख्य आरोपी कालूराम भी बरी हो गया।
हादसा-3
देसूरी घाटे में ट्रोला पलटा, 87 की मौत
बाबा रामदेव के दर्शन करने आ रहे जातरुओं से भरा ट्रोला 2007 में देसूरी घाटे में पलट गया। हादसे में ट्रोले पर सवार सभी 87 लोगों की मौत हो गई। हर साल मेले में 100 ज्यादा मौतें होती थी। इस हादसे ने सरकार को भी हिला दिया। सरकार ने नियम बनाया कि ऐसे हादसों में हाई-वे के थानाधिकारी सस्पेंड होंगे। हाई-वे पर सीसी टीवी कैमरे लगेंगे और इंटरसेप्टर भी तैनात होंगे। इनमें से एक भी काम नहीं हुआ, हाई-वे पेट्रोलिंग जरूर बढ़ाई गई।
नतीजा- हादसे में चालक की भी मृत्यु होने से मामले में एफआर लग गई।