
जोधपुर। राज्य में फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित फिनटेक इंस्टीट्यूट की रफ्तार अब थम सी गई है। बजट 2021-22 में बड़े विजन के साथ घोषित यह प्रोजेक्ट प्रदेश का पहला ऐसा संस्थान बनने वाला था, जो शिक्षा और टेक्नोलॉजी को जोड़कर नए अवसर पैदा करता। शुरुआत में इसके लिए 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 672 करोड़ रुपए कर दिया गया।
यदि यह इंस्टीट्यूट समय पर तैयार हो जाता, तो प्रदेश के युवाओं को फिनटेक सेक्टर में नई दिशा मिलती। डिजिटल पेमेंट, ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होते, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ते।
फिलहाल अधूरे निर्माण और बजट की अनिश्चितता के चलते यह प्रोजेक्ट अपनी मूल भावना से भटकता नजर आ रहा है। स्थानीय स्तर पर भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल अधर में लटक गई है। यदि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को गति नहीं मिली, तो प्रदेश फिनटेक एजुकेशन के क्षेत्र में पीछे रह सकता है, जबकि अन्य राज्य तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
तीन साल बीतने के बावजूद यह प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य धीमी गति से चलता रहा और बीच में सरकार ने बजट पर रोक लगा दी। हालिया बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 238 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी यह रफ्तार पकड़ता नजर नहीं आ रहा।
इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग के लिए पहले जिन अधिकारियों को लगाया गया था, उन्हें हटा दिया गया है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर अब किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। इसके कारण प्रोजेक्ट की प्रगति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है। वर्तमान में इसका कार्य करीब 60 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, लेकिन आगे की दिशा स्पष्ट नहीं है।