
जोधपुर. खाद्य जिंसों की शुद्धता व गुणवत्ता की जांच के लिए केन्द सरकार की वालिंटियरी स्कीम के तहत जोधपुर में स्थापित संभाग स्तरीय एगमार्क प्रयोगशाला लंबे समय से बंद पड़ी है। प्रयोगशाला बंद होने से शहर की निजी एगमार्क प्रयोगशालाओं को बढ़ावा मिल रहा है। जोधपुर के अलावा जयपुर, बीकानेर, गंगानगर, भिवाई, भरतपुर व अलवर में स्थापित प्रयोगशाला की भी यही स्थिति है।
व्यापारियों के अनुसार विजयाराजे सिंधिया कृषि उपज मंडी स्थित जीरा मंडी प्रांगण में स्थापित प्रयोगशाला स्टाफ की कमी की वजह से अधिकांशत: बंद रहती है। प्रयोगशाला में मोफेल फरनेस, ओवन, हॉट प्लेट्स जैसे उपकरणों का उपयोग न के बराबर हुआ है। अन्य उपकरण अस्त-व्यस्त पड़े हैं। केमिकल सुरक्षित रखने के लिए एसी, ऑटोमेटिक मशीनें नहीं है। प्रयोगशाला में सेम्पल की जांच के लिए एक केमिस्ट व एक सहायक केमिस्ट का पद स्वीकृत है। केमिस्ट करीब तीन वर्ष पूर्व सेवानिवृत हो गए और प्रयोगशाला का पूरा कार्यभार केवल सहायक केमिस्ट पर है। उनके पास अन्य स्थानों का भी चार्ज है और वे प्रयोगशाला को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में सही जांच अधर में ही लटकी हुई है। वहीं निजी संस्थानें जमकर चांदी कूटने में लगी हुई हैं। इससे जांच में गुणवत्ता पर भी खासे सवाल उठ रहे हैं लेकिन इस ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। इन सब खामियों के बाद भी सरकार अपनी आंखें नहीं खोल रही है।
नाममात्र शुल्क में जांच
प्रयोगशाला में सेम्पल की जांच के लिए नाममात्र का शुल्क लिया जाता है। मसालों पर 25 रुपए प्रति क्विंटल तथा आटे के लिए 5 रुपए प्रति क्विंटल लिए जाते है। घी के सेम्पल की जांच सरस डेयरी पर की जाती है। निजी प्रयोगशालाओं में ज्यादा शुल्क लिया जाता है तथा उनकी जांच भी संदेहास्पद होती है।
इनका कहना है
जिंसों के सेम्पल की जांच हो रही है। केमिस्ट के पास बीकानेर आदि का भी चार्ज है। फिर भी, उपलब्ध संसाधनों से बेहतर कार्य करने का प्रयास है।
जब्बरसिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विपणन विभाग