प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत ई-केवाइसी अनिवार्य होने के बाद लाखों लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं। कोटा जिले में भी हजारों अपात्रों को बाहर किया गया है और गिव अप अभियान के तहत 28 फरवरी तक मोहलत दी गई है।
कोटा। सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाइसी अनिवार्य कर दी है। ई-केवाइसी नहीं करवाने के कारण प्रदेश में अब तक 26 लाख लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटा दिए गए हैं। ऐसे लोगों को अब सरकारी सस्ता राशन नहीं मिलेगा। प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में 89 लाख अपात्रों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटाए गए हैं। कोटा जिले में ई-केवाइसी नहीं करवाने के कारण करीब 50 हजार तथा कुल एक लाख 70 हजार अपात्र लोगों के नाम हटाए गए हैं।
सरकार की ओर से खाद्य सुरक्षा में अपात्रों के स्वेच्छा से नाम हटाने के लिए गिव अप अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत हजारों लोगों ने स्वयं ही रसद विभाग में नाम हटाने के लिए आवेदन किया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 89 लाख 1 हजार 39 लोगों के नाम खाद्य सुरक्षा की पात्रता सूची से हटाए गए, जबकि इसी अवधि में 85 लाख 65 हजार 190 लोगों के नाम सूची में जोड़े गए हैं।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत पात्र लाभार्थियों से स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा योजना का परित्याग करने के लिए चलाए जा रहे गिव अप अभियान की अवधि 28 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। इसमें अपात्र व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी सब्सिडी छोड़ सकते हैं। चेतावनी दी गई है कि जिन अपात्रों ने अब तक गेहूं उठाया है, उनसे 27 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं की राशि वसूली जाएगी।
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार ऐसे परिवार जिनके पास चौपहिया वाहन, भवन या भूमि की संपत्ति है, आयकर दाता हैं अथवा परिवार में कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, उन्हें अपात्र माना गया है।
खाद्य सुरक्षा (राशन कार्ड) में ई-केवाइसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) एक डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया है, जो राशन कार्ड को आधार से जोड़ती है। इसका उद्देश्य फर्जी लाभार्थियों को हटाना और पात्र व्यक्तियों को ही राशन उपलब्ध कराना है। इसके तहत राशन कार्ड में शामिल सभी सदस्यों को बायोमेट्रिक के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करानी अनिवार्य है। ई-केवाइसी नहीं करवाने पर विभाग संबंधित व्यक्तियों को अपात्र मान रहा है।