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राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाली एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को फलौदी में बड़ी फजीहत का सामना करना पड़ा है। रिश्वत के खिलाफ जाल बिछाने गई एसीबी की टीम के सामने से आरोपी हेड कांस्टेबल श्रवण कुमार न केवल भागने में सफल रहा, बल्कि उसने एसीबी के सबसे अहम सबूत यानी 'वॉयस रिकॉर्डर' को भी तोड़ डाला। यह सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद फलौदी पुलिस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, हेड कांस्टेबल श्रवण कुमार ने डोडा-पोस्त से जुड़े एक मामले में आरोपी को राहत देने और रिमांड नहीं लेने के एवज में परिवादी कमल किशोर माली से 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। परिवादी इसकी शिकायत लेकर एसीबी के पास पहुँचा। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के लिए जाल बिछाया और परिवादी को रिकॉर्डर देकर हेड कांस्टेबल के पास भेजा।
जैसे ही हेड कांस्टेबल श्रवण कुमार को भनक लगी कि उसके आसपास एसीबी का शिकंजा कस चुका है, वह हिंसक हो उठा। उसने एसीबी द्वारा साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे रिकॉर्डर को छीनकर तोड़ दिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने दबिश से ठीक पहले परिवादी कमल किशोर माली के साथ मारपीट भी की। एसीबी की टीम जब तक उसे दबोच पाती, हेड कांस्टेबल श्रवण कुमार मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया।
आरोपी हेड कांस्टेबल की हिम्मत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह एसीबी की कार्रवाई से जुड़े कुछ दस्तावेज़ या साक्ष्य भी अपने साथ लेकर भागा है। पुलिस टीम ने आसपास के इलाकों में नाकाबंदी की, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला।
एसीबी की टीम के लिए यह कार्रवाई एक बड़ी विफलता मानी जा रही है क्योंकि आरोपी न केवल हाथ से निकल गया, बल्कि उसने सबूतों को भी नष्ट कर दिया।
एसीबी की इस फेल ट्रैप कार्रवाई के बाद अब आरोपी हेड कांस्टेबल श्रवण कुमार के खिलाफ फलौदी थाने में राजकार्य में बाधा, सबूत नष्ट करने, मारपीट और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक और एसीबी के आला अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की हैं।
Updated on:
14 Apr 2026, 3:57 PM IST
Published on:
14 Apr 2026, 3:41 PM IST
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