Jodhpur Building Rules: जोधपुर में घर बनाने का सपना अब लंबी प्रक्रिया में उलझ गया है, जहां एनओसी के बिना निर्माण की अनुमति मिलना मुश्किल हो गया है।
जोधपुर। यदि आप मकान या इमारत बनाने का सपना संजोए हुए हैं तो संभल जाएं, क्योंकि ऐसा करने के लिए एक साल पहले से तैयारी और जुगाड़ में लगना होगा। जोधपुर के जेडीए ही नहीं बल्कि नगर निगम क्षेत्राधिकार में कलर कोडेड जोनिंग मैप (सीसीजेडएम) की शर्तों के अनुरूप अनुमति लेने के लिए गांधीनगर (गुजरात) के चक्कर काटने होंगे।
ऐसे में न सिर्फ भूतल बल्कि इससे अधिक मंजिल के मकान या बहुमंजिला इमारत बनाने के लिए गुजरात के गांधीनगर स्थित वेस्टर्न एयर कमाण्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जरूरी है। इसके बाद ही नगर निगम या जेडीए से भवन निर्माण की अनुमति दी जा रही है। इस नियम की वजह से नगर निगम में पिछले एक साल से करीब चार सौ से अधिक आवेदन एनओसी न मिलने से अटके हुए हैं।
एयरफोर्स स्टेशन वाले क्षेत्रों में सीसीजेडएम लागू किया गया है। इसमें बहुमंजिला भवन या व्यावसायिक बिल्डिंग निर्माण के लिए निर्माणकर्ता को गांधीनगर में वेस्टर्न एयर कमाण्ड से एनओसी लाना अनिवार्य किया गया है। यह एनओसी काफी समय से जेडीए के क्षेत्राधिकार में लागू थी, लेकिन करीब एक साल पहले इसे निगम क्षेत्राधिकार में भी कड़ाई से लागू कर दिया गया है। सीसीजेडएम को पांच जोन (रेड, स्काई ब्ल्यू, पिंक, येलो, ग्रीन) में बांटा गया है। रेड जोन में निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
रेड जोन
इस क्षेत्राधिकार में भवन निर्माण कार्य पर पूरी तरह पाबंदी है। इसके लिए गुजरात के गांधीनगर में वेस्टर्न एयर कमाण्ड से एनओसी अनिवार्य की गई है।
स्काई ब्ल्यू जोन
इस जोन के क्षेत्राधिकार में भूतल और 18 फुट तक पहली मंजिल के निर्माण कार्य की ही अनुमति है।
पिंक जोन
भूतल और सात मंजिल, कुल आठ मंजिल का निर्माण करीब 78 फुट ऊंचाई तक माना जाता है। पिंक जोन में इस एनओसी की आवश्यकता नहीं है। इससे अधिक ऊंचाई के निर्माण के लिए वेस्टर्न एयर कमाण्ड की एनओसी अनिवार्य होगी।
येलो व ग्रीन जोन
इन क्षेत्राधिकार वाले क्षेत्रों के लिए भवन निर्माण की अनुमति में कुछ शिथिलता दी गई है। समुद्रतल की निर्धारित सीमा से अधिक ऊंचाई का निर्माण कराना है तो वेस्टर्न एयर कमाण्ड की एनओसी अनिवार्य होगी।
शहर के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र झालामंड, कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड, पाली रोड पर शताब्दी सर्कल (हाईकोर्ट के नए भवन क्षेत्र सहित), बासनी, एम्स, मथुरादास माथुर अस्पताल, शास्त्री सर्कल, शास्त्रीनगर, मसूरिया पहाड़ी, रातानाडा, केवी स्कूल-2, रामबाग, सैनिक अस्पताल, सिटी रेलवे स्टेशन, अजीत कॉलोनी, गौशाला मैदान, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, रेलवे कॉलोनी, मेहरानगढ़ और आसपास का क्षेत्र, भीतरी शहर, सूरसागर और पावटा शामिल हैं।
वेस्टर्न एयर कमाण्ड की एनओसी अनिवार्य किए जाने से पहले निगम ने पिछले चार वर्षों में पांच हजार से अधिक भवन निर्माण की अनुमति जारी की थी। उस समय इस एनओसी की अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए अनुमति आसानी से मिल जाती थी। अब आवेदन करने पर स्थानीय स्तर पर जांच के बाद फाइल गांधीनगर भेजी जाती है, जहां कम से कम सात से आठ महीने का समय लग रहा है। इससे भवन निर्माण में एक साल से अधिक की देरी हो रही है और लागत भी बढ़ रही है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) से जोधपुर में भवन निर्माण स्वीकृति को लेकर जो बाधाएं आ रही हैं, उनमें स्वायत्त शासन विभाग को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इस संबंध में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाकर इसका सरल समाधान निकाला जाना चाहिए। जोधपुर के मास्टर डवलपमेंट प्लान-2031 में एएआइ की सलाह से जोनवार क्षेत्र तय कर यह निश्चित किया जाना चाहिए कि किस जोन में कितनी ऊंचाई की इमारत बनाई जा सकती है, ताकि हर आवेदक को एएआइ से अनुमति लेने की आवश्यकता न पड़े और आमजन का समय व धन दोनों की बचत हो सके।