जोधपुर

गजबः आइआइटी जोधपुर ने पैरों की धूल को बनाया माथे का चंदन, जानिए कैसे

आइआइटी जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ राकेश शर्मा राजस्थान के दौसा जिले के ही है और इस मिट्टी के होने की वजह से ही वे स्वयं बालू मिट्टी की नई-नई तकनीक विश्व के सामने ला रहे हैं।
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Jul 10, 2023
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जोधपुर। जिस बालू मिट्टी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर की स्थापना की गई है, उसी बालू को आइआइटी पैरों की धूल से निकालकर माथे का चंदन बनाने पर लगी हुई है। बीते 15 साल में आइआइटी जोधपुर ने बालू मिट्टी को प्रोसस करके छह बड़े आविष्कार किए हैं, जिसमें हवाई जहाज के ईंधन से लेकर अंतरिक्ष रॉकेट का ल्यूब्रिकेंट शामिल है। इस बालू मिट्टी ने मोबाइल में बैटरी फटने की समस्या से निजात दिलाई। वहीं शॉर्क मछलियों को मारकर प्राप्त होने वाले स्क्वेलीन पदार्थ भी बालू ने तैयार कर दिया। आइआइटी जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ राकेश शर्मा राजस्थान के दौसा जिले के ही है और इस मिट्टी के होने की वजह से ही वे स्वयं बालू मिट्टी की नई-नई तकनीक विश्व के सामने ला रहे हैं।


1. शार्क मछली को बचाया, सस्ता स्क्वेलीन बनाया : दुनिया भर में नॉन इरिटेटिंग ऑइंटमेंट के लिए शॉर्क मछलियों को मारा जाता है। यह 10 लाख रुपए लीटर मिलता है। प्रो. शर्मा ने बालू मिट्टी की सहायता से पौधों के रॉ मैटेरियल से 6 हजार रुपए लीटर में सस्ता स्क्वेलीन तैयार कर दिया जो अधिक असरकारक है।

2. रॉकेट के लिए बनाया सॉलिड ल्यूब्रिकेंट : बालू मिट्टी अधिक तापमान को सह सकती है। इसका उपयोग करके सॉलिड ल्यूब्रिकेंट बनाया गया जो रॉकेट पर लगाया जा सकता है। इससे अंतरीक्ष में वायु घर्षण से बचा जा सकेगा।

3. मोबाइल की बैटरी बनाई : गर्म होने पर मोबाइल की बैटरी फटने का डर रहता है। आइआइटी ने बैटरी का कैथोड़ मिट्टी से बनाया जो उच्च ताप सहन कर सकता है।

4. अल्जाइमर रोगी को राहत : मस्तिष्क की बीमारी अल्जाइमर के लिए नई तकनीक बनाई। बालू मिट्टी को पानी में डालकर सूर्य के सामने रखकर पेस्ट तैयार किया गया, जिसको सूंघने से रोगी को काफी राहत मिलती है।

5. जेट बॉयो फ्यूल तैयार किया : हवाईजहाज के लिए बायो वेस्ट से लोहे व मिट्टी की मदद से जेट बायो फ्यूल तैयार किया जिसके उपयोग से हवाई यात्रा ट्रेन के किराए के बराबर हो सकेगी।

6. सोलर सैल विकसित करेगा : आइआइटी जोधपुर अब बालू की मदद से सोलर सैल विकसित करने में जुटा है ताकि सिलिकॉन का सस्ता विकल्प तैयार किया जा सकेगा।

दुनिया में अब तक मिट्टी को नजरअंदाज किया गया है, जबकि मिट्टी इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ रहती है। इसी दृष्टि से मैंने शोध शुरू किया और लगातार इसके वेल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार कर रहा हूं।

प्रो. राकेश शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग, आइआइटी जोधपुर

Published on:
10 Jul 2023 09:22 am