
Jodhpur : आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम का चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) दीपेश जिंदल उर्फ दीपू उर्फ अंकदास व उसका भाई आनंद जिंदल उर्फ अनू उर्फ आदिदास जोधपुर जिले के एक आश्रम से साढ़े सात साल पहले गायब होने का मामला रहस्य बना हुआ है। बेटों की तलाश में वृद्ध पिता कोलकाता के वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर है। उनका आरोप है कि बेटों के साथ कोई अनहोनी की गई है। इस संबंध में आवाज उठाने पर उन्हें वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है।
विशाखापट्टनम निवासी महेन्द्र जिंदल के तीन पुत्र है। दीपक जिंदल सीए व आनंद उर्फ अनू एक्चुअरियल साइंस डिग्री धारक हैं। माता व पिता और एक अन्य भाई आश्रम में महंत के भक्त है। ऐसे में दीपक व आनंद भी आश्रम जाने लगे थे। वर्ष 2008 या 2009 में दोनों भाई महन्त के अनुयायी बन गए थे और घर परिवार छोड़ आश्रम में ही रहना शुरू कर दिया था, जहां दीपक का नाम अंकदास व आनंद का नाम आदिदास रख दिया गया था।
दीपेश व आनंद के चाचा विमल जिंदल ने 22 जून 2019 को जोधपुर ग्रामीण के पुलिस स्टेशन खेड़ापा में दोनों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जिसमें आश्रम के महंत सहित चार जनों पर संदेह जताया था। जिसकी जांच अभी तक चल रही है। फरवरी 2018 में आनंद ने चाचा विमल को फोन कर कहा था कि वो आश्रम में नहीं रहना चाहते हैं। जल्द आश्रम छोड़कर निकलना चाहता है। छह महीने बाद अगस्त में आनंद ने फिर किसी अन्य के मोबाइल से व्हॉट्सऐप कॉल कर आधार व वोटर आइडी कार्ड भेजे थे। इनके खुद के मोबाइल बंद थे।
पिता महेन्द्र जिंदल का कहना है कि दोनों पुत्र फरवरी 2018 में आश्रम से गायब हैं। दोनों 10-11 साल से आश्रम में ही रह रहे थे। वे आश्रम से निकलना चाहते थे। दोनों बेटों के साथ कोई अनहोनी हो गई होगी।
राज्य के मानवाधिकार आयोग में भी लिखित शिकायत की गई है। आयोग समय-समय पर पुलिस से मामले की प्रगति रिपोर्ट ले रहा है, पर अभी तक दोनों भाइयों का पता नहीं लग सका है।
जून 2019 में आश्रम से दो भाइयों के गायब होने के संबंध में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। दोनों अभी तक मिले नहीं हैं। तलाश के प्रयास किए जा रहे हैं।
लाखाराम, थानाधिकारी पुलिस स्टेशन खेड़ापा जोधपुर (ग्रामीण)