
Jodhpur High Court : राजस्थान हाईकोर्ट की 2019 में उद्घाटित नई इमारत का करीब 21 मीटर ऊंचा सेंट्रल डोम कभी भी गिर सकता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आइआइटी), बॉम्बे के विशेषज्ञों की ओर से ढहने की आशंका जताए जाने की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वप्रेरणा से संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए और केंद्र व राज्य सरकार सहित संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ कहा कि संवैधानिक अदालत के परिसर में मौजूद लोगों की सुरक्षा सर्वाेच्च है और किसी भी स्थिति में इससे समझौता नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी व न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने 24 अगस्त को राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन, डीजीपी राजीव शर्मा, वित्त विभाग व सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव और आरएसआरडीसी के प्रबंध निदेशक सहित जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा है। साथ ही आइआइटी जोधपुर और आइआइटी बॉम्बे के एक-एक नामित विशेषज्ञ तथा संरचनात्मक ऑडिट करने वाली एजेंसी के एक प्रतिनिधि को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
खंडपीठ ने कहा कि भवन की हालत कुछ ही वर्षों में बेहद खराब हो गई है। भवन का कब्जा मिलने के 5 वर्ष पूरे होने से पहले ही इसमें कई संरचनात्मक खामियां सामने आ गईं। कोर्ट ने कहा कि डोम की हालत को लेकर विशेषज्ञों की राय के अनुसार उसके गिरने की आशंका बनी हुई है। ऐसी स्थिति में हादसा होने पर जान-माल के नुकसान के साथ संवैधानिक अदालत की गरिमा और उसके कामकाज को भी अपूरणीय क्षति हो सकती है।
इधर, डोम के निचले हिस्से में आवाजाही रोक दी गई है। खंडपीठ ने भवन में व्यापक सीपेज और पानी के प्रवेश, खराब गुणवत्ता वाले सैनिटरी पाइप व फिटिंग से लगातार लीकेज, अपर्याप्त फायर सेफ्टी व्यवस्था, खराब ड्रेनेज सिस्टम तथा लोड-बेयरिंग और अन्य संरचनात्मक हिस्सों में बढ़ती दरारों का भी उल्लेख किया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्याय मित्र के तौर पर कोर्ट की सहायता करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को 24 अगस्त तक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। इसमें सभी सुरक्षा ऑडिट, स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग, भवन की भार-वहन क्षमता और शेष जीवन से जुड़े आकलन की जानकारी देनी होगी। साथ ही सीपेज, सैनिटरी व्यवस्था, फायर सेफ्टी, ड्रेनेज और बार-बार छत गिरने के कारणों तथा निर्माण, निगरानी, रखरखाव और मौजूदा कार्यों में शामिल प्रत्येक एजेंसी की भूमिका और जवाबदेही बतानी होगी।
1- डोम और सभी महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों की 24 घंटे लगातार निगरानी की जाए और रोजाना लिखित रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जाए।
2- प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर प्रवेश प्रतिबंधित या पूरी तरह बंद किया जाए और प्रॉपिंग, शोरिंग, स्टील स्कैफोल्डिंग व प्रोटेक्टिव नेटिंग जैसे सुरक्षा उपाय तत्काल किए जाएं।
3- हिंदी और अंग्रेजी में स्पष्ट चेतावनी बोर्ड, बैरियर और एक्सेस कंट्रोल लागू किया जाए।
4- 48 घंटे में विस्तृत सुरक्षा व निकासी प्रोटोकॉल तैयार कर सभी जजों, अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और सुरक्षा कर्मियों को उपलब्ध करवाया जाए।
5- 72 घंटे में मॉक ड्रिल कराई जाए।
6- सभी अस्थायी और स्थायी कार्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाओं के सक्षम स्ट्रक्चरल इंजीनियरों की सीधी निगरानी में हों।
7- हाईकोर्ट परिसर में 24 गुणा 7 कंट्रोल रूम बनाया जाए।
8- डोम व अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की वर्तमान स्थिति की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग तत्काल करवाकर सुरक्षित रखी जाए।
9- स्थायी समाधान के लिए डोम को मजबूत करने, पुनर्निर्माण या पूरी तरह बदलने सहित समयबद्ध और लागत सहित कार्ययोजना पेश की जाए।
आधारशिला वर्ष - 2007
क्षेत्रफल - 168 बीघा
निर्माण प्रारंभ वर्ष - 2011
ढांचागत निर्माण पूरा हुआ - 2013 के अंत तक
नवीन भवन का उद्घाटन - 7 दिसंबर, 2019
कुल खर्च - 277 करोड़ 16 लाख।