Bjp Mla Bhairaram Siyol: विधायक भैराराम सियोल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि पिता ने तीन जूते मारे तो वे MLA बन गए, पांच मारते तो सांसद बन जाते।
Bjp Mla Bhairaram Siyol Viral Video: ओसियां (जोधपुर): राजस्थान की राजनीति में अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले ओसियां विधायक भैराराम सियोल एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। जोधपुर में आयोजित एक धार्मिक जागरण कार्यक्रम के दौरान विधायक ने संस्कारों और माता-पिता के अनुशासन पर ऐसी बात कही, जिसने न केवल वहां मौजूद लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। बल्कि सोशल मीडिया पर एक नई बहस भी छेड़ दी है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भैराराम सियोल ने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए मजाकिया लहजे में कहा, आज मैं जो कुछ भी हूं, अपने माता-पिता के संस्कारों की वजह से हूं। बचपन में मेरे पिता ने मुझे तीन जूते (डांट/फटकार के संदर्भ में) मारे थे, तो आज मैं विधायक बन गया। अगर उस समय उन्होंने मुझे पांच जूते मारे होते, तो शायद आज मैं सांसद होता।
उनके इस चुटीले अंदाज पर पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। हालांकि, इस मजाकिया उदाहरण के जरिए विधायक सियोल एक गहरा संदेश देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी माता-पिता के अनुशासन को 'बंधन' समझने लगी है, जबकि असल में वही अनुशासन व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है।
सियोल ने युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि माता-पिता का अनुभव जीवन की सबसे बड़ी पाठशाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो बच्चे अपने बुजुर्गों का सम्मान करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं, वे कभी असफल नहीं होते।
विधायक के अनुसार, संस्कारों से दूर होने वाला युवा अक्सर जीवन की राह से भटक जाता है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को सुख-सुविधाओं के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दें।
यह पहला मौका नहीं है, जब भैराराम सियोल अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आए हैं। इससे पहले भी वे प्रेम विवाह और भागकर शादी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सुझाव दिया था कि बिना माता-पिता की सहमति के होने वाले विवाह को कानूनी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
उनके इस ताजा बयान के बाद एक बार फिर समाज में संस्कार, अनुशासन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जहां एक वर्ग उनके विचारों को पारंपरिक मूल्यों का समर्थन मान रहा है। वहीं, दूसरा वर्ग इसे अलग नजरिए से देख रहा है।