
जोधपुर . केन्द्र सरकार के चार साल पूरे होने और प्रदेश में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव के मद्देनजर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि केन्द्रीय रेल और वित्त मंत्री पीयूष गोयल यहां जोधपुर की मांगों पर कुछ राहत के छींटे डालेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अपने एक घंटे से लम्बे भाषण में उन्होंने जोधपुर का नाम तो लिया लेकिन सिर्फ अब तक दी गई सौगातों को गिनाने के लिए। इसके बाद उन्होंने सिर्फ केन्द्र सरकार की उपलब्धियां ही गिनाईं। इस कारण जोधपुर की जनता की फिर से उपेक्षा हो गई। इससे यहां के लोगों में सरकार के रवैये को लेकर खासा रोष है। लोगों का कहना है कि राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार ने भी उनके साथ रूखा व्यवहार अपनाया है।
गोयल ने शुरुआत में ही कहा कि जोधपुर और पाली दोनों के सांसद केन्द्र में राज्य मंत्री हैं और अपने क्षेत्र की सर्वाधिक मांग रखते हैं। मेरे पास 50 मांगें इन्होंने रख दी हैं। लेकिन इन मांगों को पूरा करने की बजाय वे बोले, जब मैंने मंत्रालय संभाला तो पाया कि कई 25 साल पुराने प्रोजेक्ट भी अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उनकी प्रगति भी 15 से 20 प्रतिशत ही है। ऐसे में हमने निर्णय किया कि नई घोषणाएं करने से पहले उन प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे।
बिना हाथ-मुंह काले किए कोयला मंत्रालय देखा
जब कोयला मंत्रालय मेरे पास आया तो लोगों ने कहा इसमें हाथ काले होंगे। लेकिन हमें निष्पक्ष तरीके से कोल खान आवंटन की। जो इससे पहले नेताओं के रिश्तेदारों को ही मिलती थी। इसमें हमारे हाथ-मुंह कुछ भी काले नहीं हुए।
मोदी न खुद सोते न मंत्रियों को सोने देते हैं
केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री और जोधपुर सांसद गजेन्द्रसिंह शेखावत ने पीएम की कार्यशैली के बारे में कहा कि वे जनता को कहते हैं कि न खुद खाउंगा और न खाने दूंगा। लेकिन मंत्रियों में यह प्रचलित है कि न खुद सोउंगा और न सोने दूंगा।