जोधपुर

राजस्थान हाईकोर्ट ने आटा-साटा प्रथा को सौदेबाजी बताया, कहा- बेटी किसी दूसरे बेटे की शादी की गारंटी नहीं

Aata Sata Tradition: राजस्थान हाईकोर्ट ने आटा-साटा प्रथा पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बच्चों, खासकर लड़कियों, को वैवाहिक सौदेबाजी का माध्यम बना देती है।
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May 18, 2026
rajasthan high court jodhpur
राजस्थान हाईकोर्ट। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री पारित करते हुए कहा कि नाबालिग बच्चों से जुड़ी आटा-साटा प्रथा बच्चों, विशेषकर लड़कियों, को वैवाहिक सौदेबाजी का माध्यम बना देती है। न्यायाधीश अरुण मोंगा और न्यायाधीश सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने पत्नी की ओर से दायर अपील स्वीकार करते हुए बीकानेर फैमिली कोर्ट के 24 सितंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। फैमिली कोर्ट ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत दायर तलाक याचिका खारिज कर दी थी।

मामले में पत्नी ने दहेज की मांग, मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि उससे मोटरसाइकिल और सोने के आभूषणों की मांग की गई तथा उसे ससुराल से निकाल दिया गया। वहीं पति ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि विवाह आटा-साटा प्रथा के तहत हुआ था, जिसके अंतर्गत उसकी बहन का विवाह भी अपीलकर्ता के भाई से किया गया था। पति का कहना था कि उसकी बहन की ओर से बालिग होने के बाद मुकलावा करने से इनकार करने के कारण विवाद शुरू हुआ।

'मानव जीवन का लेन-देन'

खंडपीठ ने कहा कि जिसे सामुदायिक परंपरा बताया जाता है, वह वास्तव में मानव जीवन का लेन-देन है। एक बालिका किसी पारस्परिक सौदे की कीमत नहीं हो सकती। बेटी किसी दूसरे बेटे के विवाह की गारंटी नहीं है। बचपन से दबाव और सामाजिक शर्तों के बाद बालिग होने पर दी गई सहमति को स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आटा-साटा जैसी व्यवस्था बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करती है और ऐसी प्रथाओं को कानून तथा समाज दोनों स्तरों पर अस्वीकार किया जाना चाहिए।

जमानत रद्द करने से इनकार

वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में आरोपी महिला पुलिस अधिकारी सीमा जाखड़ की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करना एक कठोर कदम है और केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर पहले से दी गई जमानत को निरस्त नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर जमानत निरस्तीकरण याचिका खारिज करते हुए कहा कि राज्य को ऐसी याचिका दायर करने से पहले उचित कानूनी सलाह लेनी चाहिए थी।

मामला सिरोही जिले के बरलूट थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार 14 नवंबर 2021 को कार में जा रहे रमेश कुमार और दिनेश कुमार के पास से 141 किलो डोडा पोस्त बरामद हुआ था। आरोप है कि उस समय बरलूट थानाधिकारी रही सीमा जाखड़ ने सह आरोपी हेमाराम और अशोक से 10 लाख रुपए की रिश्वत लेकर मामले को कमजोर किया।

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेंद्र सिंह और अधिवक्ता प्रियंका बोराणा ने कहा कि प्रतिवादी ने जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है, इसलिए जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत रद्द करने और जमानत आदेश को अवैध बताकर निरस्त करने में अंतर होता है। कोर्ट ने कहा कि जमानत तभी रद्द की जा सकती है जब आरोपी जमानत का दुरुपयोग करे, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करे, गवाहों को प्रभावित करे या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाले।

Updated on:
18 May 2026 08:50 pm
Published on:
18 May 2026 08:50 pm
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