Infection From Pigeons In Jodhpur: जोधपुर में बढ़ती कबूतरों की संख्या अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन रही है। उनकी बीट और पंखों के कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर खतरनाक बीमारियां पैदा कर रहे हैं।
जोधपुर। शहरों में तेजी से बढ़ती कबूतरों की संख्या अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कबूतरों की बीट (मल) में मौजूद फंगस और सूक्ष्म कण हवा में घुलकर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। साथ ही उनके पंखों में मौजूद कण भी सांस लेने में तकलीफ पैदा कर रहे हैं।
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डॉक्टरों के अनुसार, हाल के महीनों में बिना कफ वाली सूखी खांसी के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। यह खांसी धीरे-धीेरे गंभीर रूप लेकर हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस यानी एचपी का रूप ले लेती है। जोधपुर में प्रतिदिन ऐसे 10 से 15 नए मामले सामने आ रहे हैं। इस प्रकार की खांसी को ठीक होने में 20 दिन तक का समय लगता है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह सीओपीडी या जानलेवा स्थिति का रूप भी ले सकती है। इस एचपी बीमारी के 80 से 90 प्रतिशत मामलों में कारण कबूतरों का संपर्क है।
एक स्कूल शिक्षिका अपने बच्चों का ध्यान रखने के लिए समय से पहले स्कूल पहुंचकर कबूतरों की बीट साफ करती थी। लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण वह हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस यानी एचपी की शिकार हो गई। यह फेफड़ों की एक बीमारी है, जो कबूतरों के संपर्क में आने से होती है।
एक फ्लैट में रहने वाले परिवार के सदस्यों को भी एचपी की बीमारी हो गई। उपचार के बावजूद लंबे समय तक आराम नहीं मिला। इसके बाद चिकित्सकों ने जांच की तो उनकी बिल्डिंग में कबूतरों की आवाजाही पाई गई। चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने दवा के साथ कबूतरों से दूरी बनाई और नेट लगवाया, जिसके बाद बीमारी में सुधार हुआ।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कबूतरों की बीट सूखकर पाउडर जैसी बन जाती है, जो हवा में आसानी से उड़ती है। इसके कण फेफड़ों में पहुंचकर एलर्जी, संक्रमण और फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से सांस फूलना, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
घरों की बालकनी, छत और खिड़कियों पर कबूतरों को बैठने से रोका जाए। नियमित सफाई और मास्क का उपयोग भी जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। हमारे यहां आईएलडी में एचपी सबसे सामान्य बीमारी है। मरीजों की हिस्ट्री जांचने पर पता चलता है कि वे कबूतरों के संपर्क में रहे हैं या उनके घरों के आसपास उनकी आवाजाही अधिक है।