जोधपुर

Rajasthan: राजस्थान के चिकित्सा विभाग में मचा हड़कंप, एक साथ 44 CMHO को कारण बताओ नोटिस जारी

Rajasthan Health Department News: प्रदेश में चिकित्सा संस्थानों की जानकारी समय पर अपडेट नहीं करने पर स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। लापरवाही सामने आने पर 44 सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

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Mar 17, 2026
एआई तस्वीर

Rajasthan CMHO Notice Case जोधपुर। सेहत के पहरेदार कहे जाने वाले अधिकारी ही सेहत के मंदिरों की हालत सुधारने में लापरवाही बरतते नजर आए। जिन संस्थाओं की स्थिति बेहतर करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग जरूरी थी, उनकी ओर ध्यान तक नहीं दिया गया। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए प्रदेश के 44 सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सा संस्थाओं तथा शहरों में पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल स्तर तक के चिकित्सा ढांचे को व्यवस्थित करने के लिए ओडीके ऐप लॉन्च किया गया था। इस ऐप के माध्यम से हर चिकित्सा संस्थान को अपनी स्थिति की नियमित जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होती है, ताकि स्वास्थ्य विभाग को वास्तविक स्थिति का पता चल सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें। ऐप में चिकित्सा संस्थान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज करना अनिवार्य है।

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बड़ी लापरवाही, डेढ़ माह में नहीं भेजी जानकारी

विभागीय समीक्षा में सामने आया कि पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में चिकित्सा संस्थानों ने ऐप में जानकारी अपडेट नहीं की। कई स्थानों पर लंबे समय से कोई डेटा अपलोड नहीं किया गया, जिससे विभागीय मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए निदेशक, जन स्वास्थ्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं ने प्रदेश के 44 सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सा संस्थानों की स्थिति की नियमित जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। ऐसे में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

यह भेजनी होती है जानकारी

  • चिकित्सा संस्थान का नाम और स्थान।
  • भवन सरकारी है या किराए का।
  • भवन की वर्तमान स्थिति।
  • किसी प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा है या नहीं।
  • संस्थान नियमित रूप से उपयोग में है या नहीं।
  • मौके की फोटो अपलोड करना अनिवार्य।
  • नियमित अपडेट से विभाग को मिलती है वास्तविक स्थिति की जानकारी।

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