लेह हिंसा मामले में रासुका के तहत जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा में जोधपुर एम्स लाया गया। दूषित पानी से पेट दर्द की शिकायत पर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच की।
Sonam Wangchuk: जोधपुर: लेह में हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद प्रख्यात पर्यावरणविद् और सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह कड़े सुरक्षा घेरे में जोधपुर एम्स (AIIMS) लाया गया। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेशों के बाद जेल प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य की गहन जांच करवाई है।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आगमो ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर जेल में उनके पति के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जेल में दूषित पानी और उचित सुविधाओं के अभाव के कारण वांगचुक की सेहत बिगड़ रही है। इस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया था कि वे तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों से वांगचुक की जांच कराएं और उसकी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सोनम वांगचुक को पेट में तेज दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं की शिकायत थी। बताया जा रहा है कि जेल के दूषित पानी के सेवन की वजह से उन्हें यह समस्या हुई। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे पुलिस की टुकड़ी उन्हें लेकर एम्स पहुंची। यहां गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनके कई मेडिकल टेस्ट किए। करीब 2 घंटे तक चली जांच प्रक्रिया के बाद उन्हें वापस जेल ले जाया गया।
वांगचुक की लोकप्रियता और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्स परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। आम मरीजों को असुविधा न हो और सुरक्षा में चूक न रहे, इसके लिए उन्हें सुबह जल्दी अस्पताल लाया गया। जेल प्रशासन अब उनकी मेडिकल रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगा, जिसके आधार पर कोर्ट उनके इलाज या जेल की सुविधाओं पर आगे का फैसला सुना सकता है।
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेह में हुई हिंसक घटनाओं के बाद उन पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें जोधपुर जेल भेज दिया गया था।