
Kuno Cheetah Reaches Karauli Mandarail Forest: करौली जिले के जंगलों का प्राकृतिक वातावरण और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चीतों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश के कूनो से निकलकर चीते बार-बार करौली जिले के जंगलों का रुख कर रहे हैं। करीब छह महीने बाद एक बार फिर कूनो का चीता मंडरायल वन क्षेत्र में पहुंच गया है। मंगलवार रात मंडरायल की चंदेलीपुरा पंचायत के दरुरा गांव के जंगल में चीते की मौजूदगी सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क हो गया।
बता दें कि चीते की निगरानी के लिए राजस्थान और मध्यप्रदेश वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम और कैमरों की मदद से चीते की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग की टीमें उसकी लोकेशन और विचरण क्षेत्र को लगातार ट्रैक कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, चीते की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
कूनो से निकलकर करौली के जंगलों में चीतों की दस्तक का सिलसिला पुराना है। इसी साल 7 मई को भी एक चीता कूनो वन क्षेत्र से निकलकर मंडरायल के जंगलों में पहुंचा था। इसके अगले दिन 8 मई को वह धौलपुर जिले की ओर चला गया।
करीब एक सप्ताह बाद फिर उसने करौली के मासलपुर क्षेत्र में दस्तक दी। इससे पहले पिछले साल भी एक चीता करणपुर क्षेत्र के जंगलों में पहुंचा था। इस तरह कूनो के चीते अब तक चार-पांच बार जिले के अलग-अलग वन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि करौली जिले के करणपुर, मासलपुर और मंडरायल क्षेत्र की भौगोलिक बनावट और प्राकृतिक वातावरण चीतों के विचरण के अनुकूल हैं। चीता बड़े वन क्षेत्र में विचरण करने का आदी होता है और अपनी जरूरतों के अनुसार लंबी दूरी तय करता है।
ऐसे में इन क्षेत्रों का अनुकूल परिवेश उसे बार-बार अपनी ओर खींच रहा है। कूनो से निकलकर करौली के जंगलों में चीतों की लगातार आवाजाही इस बात का संकेत है कि जिले के वन क्षेत्र उनके स्वाभाविक विचरण के लिए मुफीद साबित हो रहे हैं।