कासगंज

मेरा टेसू मेरा यहीं खड़ा, मांग रहा है दही बड़ा, देखें वीडियो

‘टेसू अगर करें, टेसू मगर करें, टेसू लेके ही टरें, टेसू मेरा यहीं खड़ा, मांग रहा है दही बड़ा, दही बड़े में पन्नी, लाओ सेठ अठन्नी’
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Oct 19, 2018
टेसू
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कासगंज। ‘टेसू अगर करें, टेसू मगर करें, टेसू लेके ही टरें, टेसू मेरा यहीं खड़ा, मांग रहा है दही बड़ा, दही बड़े में पन्नी, लाओ सेठ अठन्नी’ के बोल एक दिन बाद कासगंज शहर के गली और मोहल्लों में सुनाई देने लगेंगे। इसको लेकर बाजार पूरी तरह से टेसू और झांझी से सज-धज कर तैयार हो गया है। इस बार टेसू झांझी पर भी महंगाई की मार साफ दिखाई दे रही है।

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शरद पूर्णिमा पर होगा विवाह

आपको बता दें कि प्राचीन पर्व टेसू झांझी के विवाह रचाने का सदियों से प्रचलन है। यह प्रचलन आज अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। दशहरे के मेले से बच्चे टेसू झांझी खरीद कर लाते हैं और घर-घर जाकर दशहरे के चौदस तक टेसू अगर करें, टेसू मगर करें, टेसू लेके टरे जैसे बोलों के साथ नेग मांगते हैं। शरद पूनों की रात्रि में झांझी टेसू के विवाह का स्वांग कर रात में बाकायदा सब स्त्रियां एकत्रित होकर नाच गाना करती हैं। फिर खील, बताशे, रेवड़ी बांटी जाती है।

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महंगाई की मार

इसी मान्यता के चलते कासगंज जनपद के बच्चों में खासा उत्साह होता है। नगर के विभिन्न इलाको में कुंभकारों द्वारा झांझी, टेसू के प्रतीकों की दुकानें सजने लगी हैं। बच्चे जमकर खरीददारी कर रहे हैं। महंगाई की मार भी पड़ रही है। कुंभकार ज्ञान सिंह ने बताया कि पहले तीन सौ रुपये की मिट्टी की बुग्गी आती थी, अब पांच सौ से छह सौ रूपये की मिलती है। इस कारण समस्या है। नए युग में टेसू झांझी के प्रति बच्चों का उत्साह भी कम है।

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Published on:
19 Oct 2018 08:07 am