
Katni Ambulance Negligence Case: मध्यप्रदेश के कटनी में गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक मानी जाने वाली 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा की बदहाल व्यवस्था जिला अस्पताल में खुलकर सामने आ गई। कैंसर पीड़ित एक मरीज को निवार से जबलपुर ले जाना था लेकिन रास्ते में परिजनों को पता चला कि जिस एम्बुलेंस में मरीज की जान बचाने की जिम्मेदारी थी, उसमें ऑक्सीजन ही नहीं थी। इतना ही नहीं, एम्बुलेंस की लाइट बंद थी और उसका पिछला गेट रस्सी से बांधकर चलाया जा रहा था। नाराज परिजनों ने जिला अस्पताल पहुंचकर हंगामा किया और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
पहाड़ी निवासी संतोष कुमार जैन के पुत्र वरदान जैन ने बताया कि उनके पिता कैंसर से पीड़ित हैं और उन्हें अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी। सूचना पर 108 संजीवनी एम्बुलेंस पहुंची और मरीज को लेकर रवाना हुई, लेकिन रास्ते में पता चला कि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन उपलब्ध ही नहीं है। अंदर पूरी तरह अंधेरा था और गेट भी रस्सी के सहारे बांधा गया था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कर्मचारियों से बायपास पर उतार देने का आग्रह किया ताकि वे निजी वाहन से तत्काल जबलपुर पहुंच सकें, लेकिन कर्मचारियों ने नियमों का हवाला देते हुए मना कर दिया और मरीज को जिला अस्पताल ले आए। परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि रास्ते में मरीज की हालत और बिगड़ जाती या कोई अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।
मामले में एम्बुलेंस में तैनात एएमटी कर्मचारी शिवानी ने भी व्यवस्था की पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि वाहन की वायरिंग खराब होने से लाइट बंद है और ऑक्सीजन पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो पा रही है। इस संबंध में प्रभारी अधिकारी को कई बार मौखिक और लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं कराया गया। घटना के बाद जिला अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। इस मामले पर जब सीएमएचओ डॉ. राज सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। 108 एम्बुलेंस में जो भी तकनीकी कमियां हैं, उन्हें संबंधित एजेंसी से तत्काल दूर कराया जाएगा। उपचार में इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।