इमलिया गांव में धरती के अंदर वर्षों से दबी उम्मीदें अब होंगी हकीकत, मार्च से शुरू होगा सोने की खदान में खनन, खनिज विभाग अपना रहा भू-प्रवेश की प्रक्रिया, कंपनी शुरू करेगी मशीनें लगाने की कार्रवाई, इसके बाद शुरू होगा खनन
बालमीक पांडेय @ कटनी. कटनी की धरती अब सिर्फ संगमरमर और खनिजों के लिए नहीं, बल्कि सोने की चमक के लिए भी पहचानी जाएगी, ढीमरखेड़ा जनपद के ग्राम इमलिया में वर्षों से दबी उम्मीदें अब हकीकत बनने जा रही हैं, 50 साल की खोज और बीते एक साल की तेज प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद स्वर्ण खनन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, मार्च से खनन कार्य शुरू होने का अनुमान है, जो मध्यप्रदेश के खनिज इतिहास में नया अध्याय लिखेगा, 121 करोड़ की ऐतिहासिक बोली ने इमलिया को राष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया है। अब कटनी सिर्फ जिला नहीं, स्वर्ण नगरी बनने की दहलीज पर खड़ी है...।
जिले के इतिहास में एक ऐसी उपलब्धि जुडऩे जा रही है, जो न केवल जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान बदल देगी। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम इमलिया में स्वर्ण खनन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और मार्च माह के दूसरे पखवाड़े से खनन कार्य शुरू होने का अनुमान है। यह मध्यप्रदेश की पहली सक्रिय स्वर्ण खदान होगी, जिससे राज्य को राष्ट्रीय खनिज मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत मुंबई की कंपनी प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड खनन कंपनी ने 121 करोड़ रुपए की ऊंची बोली लगाकर इमलिया गोल्ड ब्लॉक की खनन लीज हासिल की। कंपनी और कलेक्टर आशीष मिवारी के बीच खनन अनुबंध (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के साथ ही जिले में विकास, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के नए द्वार खुल गए हैं।
इमलिया गांव के बुजुर्ग रामकुमार बताते हैं कि गांव में सोने की मौजूदगी की जानकारी पिछले लगभग 50 वर्षों से थी। जिस स्थान पर खनन होना है, उसे स्थानीय लोग आज भी सुनाही नाम से जानते हैं। यहां चार-पांच पुराने कुएं मौजूद हैं, जिनका निर्माण उस दौर में हुआ था जब मजदूरी केवल 6 पैसे हुआ करती थी। ग्रामीणों का मानना है कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज इन्हीं कुओं के जरिए धातु निकालते थे, लेकिन उस समय ग्रामीणों को यह अहसास नहीं था कि उनके गांव की मिट्टी में सोना छिपा है।
इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार सक्रियता रही। 18 सितंबर को बड़वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से कटनी को कनकपुरी की संज्ञा देते हुए इमलिया गांव में स्वर्ण भंडार की सार्वजनिक जानकारी दी थी। इसके बाद नवरात्रि के पहले दिन ही खनन से जुड़ा एग्रीमेंट होना, इस परियोजना की प्राथमिकता और गंभीरता को दर्शाता है।
हालांकि सोने की खोज का सफर 1974 में शुरू हुआ था, लेकिन बीते एक वर्ष में इस परियोजना ने निर्णायक गति पकड़ी। 70 से अधिक ड्रिलिंग और बोरिंग के जरिए लिए गए सैंपल्स की जांच में सोने के साथ-साथ अन्य बहुमूल्य खनिजों की पुष्टि हुई। वर्ष 2020 में लीज को सैद्धांतिक मंजूरी, अक्टूबर 2023 में खनन योजना को अंतिम स्वीकृति, 2024-25 में ई-नीलामी और अनुबंध प्रक्रिया पूरी हुई। अब मार्च 2026 से बड़े पैमाने पर खनन शुरू होने की उम्मीद है।
खनन विभाग की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार इमलिया गोल्ड ब्लॉक से प्रतिवर्ष लगभग 33,214 टन अयस्क उत्पादन का अनुमान है। यहां कुल स्वर्ण खनिज भंडार 3,57,789 टन बताया गया है, जिसमें से 3,35,059 टन खानयोग्य है। तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, प्रति टन अयस्क से औसतन 1.13 ग्राम सोना निकलने की संभावना है। इसके अलावा तांबा 2,71,632 टन, लेड-जिंक 3,88,726 टन, चांदी 3,86,468 टन का अनुमान है।
गांव और आसपास के क्षेत्र में इस परियोजना को लेकर उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि खनन शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार, बेहतर सडक़, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। इमलिया की पहचान अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जानी जाएगी। अब तक देश में बड़े पैमाने पर स्वर्ण खनन कर्नाटक के कोलार और हत्ती क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन इमलिया खदान के शुरू होते ही मध्यप्रदेश भी स्वर्ण उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा। मार्च से शुरू होने वाला यह खनन न केवल कटनी को स्वर्ण नगरी के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी नई ऊंचाई देगा।
मार्च में सोने की खदान शुरू होने का पूरा अनुमान है। तैयारी भी उसी स्तर पर चल रही है। भू-प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया अंतिम पड़ाव में है। भू-प्रवेश करते ही काम कंपनी शुरू कर देगी। प्रोडक्शन के लिए मशीनें लगाने का काम किया जाएगा। जो भी माइंस में विस्तार के काम करने है वह काम चलेगा।