१०० दिन का रोजगार मिला न विभाग खर्च कर पाया राशि, जिले में मनरेगा योजना लक्ष्य से पीछे, विकास कार्यों में भी गुणवत्ता से खिलवाड़
कटनी. गरीब, मजदूरों, आदिवासियों की दिशा-दशा सुधारने के लिए २००७ में मनरेगा योजना की शुरूआत हुइ। इससे लोगों में उम्मीद जगी कि गांवों का विकास होगा, जरुरतमंदों के स्तर में सुधार होगा, लेकिन जिले में यह योजना मुख्यधारा से अबतक नहीं जुड़ पाइ। मनरेगा का जिम्मा संभाल रही जिला पंचायत सालभर में पर्याप्त लोगों को न तो १०० दिन का रोजगार दिला पाइ और ना ही विकास कार्य के लिए आइ राशि खर्च कर पाया। २०१७-१८ में ९७ करोड़ ८६ लाख ३३ हजार रुपए विकास कार्य में खर्च किए जाने थे, लेकिन मार्च माह तक विभाग जनपद और ग्राम पंचायतों के माध्यम से सिर्फ ६२ करोड़ ४६ लाख रुपए की खर्च कर पाया है। ३४ करोड़ ४० लाख ३३ हजार रुपए खातों की ही शोभा बढ़ाते रहे। हैरानी की बात तो यह है कि जरुरतमंदों को रोजगार नहीं मिला, सिर्फ कागजों में ही १०० दिन के रोजगार की गारंटी चल रही है। ३३ हजार ४८६ कार्य स्वीकृत हुए थे, जिसमें से अभी भी २५ हजार से अधिक अधूरे हैं। महज ७ हजार ६२९ कार्य ही पूर्ण हुए हैं। इन अधूरे कामों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर हैं।
हजारों मजदूरों को नहीं मिला काम
सरकार द्वारा जिस मंसा को लेकर योजना शुरू की गई थी वह मुख्य धारा से भटक रही है। गरीब, आदिवासी, मजदूरों को गांव में ही पर्याप्त काम और मजदूरी मिले इसके लिए यह योजना चल रही थी। २०१७-१८ में ३२ लाख ५६ हजार मानव दिवस याने कि इतने लोगों को जॉब कार्ड के माध्यम से १०० दिन का काम देना था, लेकिन ५६ हजार से अधिक गरीबों को काम ही नहीं मिला। वहीं २०१८-१९ के लिए ४० लाख मानव दिवस व १२० करोड़ रुपए से विकास कार्यों का लक्ष्य तय किया गया है।
ये काम पड़े अधूरे
जिले में मनरेगा योजना के तहत जो काम हो रहे हैं उसमें से अधिकांश अधूरे पड़े हैं। इसमें तालाबा निर्माण, जीर्णोद्धार, नवीन तालाब, बंड विस्तार, शांतिधाम निर्माण, खेल मैदान, सुदूर सड़क, कपिलधारा, हितैषी कपिला धारा, आंगनवाड़ी केंद्र, सीसी रोड, पौधरोपण सहित अन्य काम अधूरे हैं।
मानकों पर खरी नहीं योजनाएं
मनरेगा योजना के तहत हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है। इसकी मुख्य वजह है कि अब यह योजना मजदूरी नहीं बल्कि कार्यों पर आधारित हो गई है। योजना के शुरूआत में विकास कार्य का स्टीमेट तय होता था इसके बाद काम होते थे, लेकिन अब हर योजना में राशि फिक्स कर दी गई है।
इनका कहना है
शासन द्वारा तय लक्ष्य सहित प्राप्त योजनाओं पर जिले में काम हो रहा है। तकनीकी समस्या सहित अन्य कारणों से कई विकास कार्य अभी पूरे नहीं हो पाए हैं, प्रगति पर हैं। हर जरुरतमंद को रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है।
संतोष बाल्मीक, मनरेगा प्रभारी, जिला पंचायत।