
Chhattisgarh News: कबीरधाम जिले में खरीफ सीजन के बीच किसानों के साथ खाद के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आ रहा है। कृषि विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद कई कृषि केंद्रों में नियमों की अनदेखी और अमानक उर्वरकों की बिक्री का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पिछले एक माह में विभाग ने चार बड़ी कार्रवाई की है। दो कृषि केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए, दो दुकानों की उर्वरक बिक्री पर रोक लगाई गई और 41 कृषि केंद्र संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन सबके बीच सबसे चौंकाने वाला खुलासा बोड़ला के गोलू कृषि केंद्र से लिए गए एमओपी (पोटाश) उर्वरक के नमूने में हुआ, जहां जांच में 60 प्रतिशत जल घुलनशील पोटाश की जगह शून्य प्रतिशत पोटाश मिला।
उर्वरक निरीक्षक विरेंद्र कुमार यादव ने नियमित निरीक्षण के दौरान बोड़ला के गोलू कृषि केंद्र से एमओपी उर्वरक का नमूना लिया था। नमूने की पहली और दूसरी जांच के बाद तृतीय परीक्षण भी कराया गया। तृतीय परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद कृषि विभाग ने गुरुवार शाम गोलू कृषि केंद्र की उर्वरक बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया।
विभाग के अनुसार, यह उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के क्लॉज 19(ए) एवं अनुसूची.1,1 (सी) का उल्लंघन है। साथ ही यह आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
एक महीने में चार बड़ी कार्रवाई, दो लाइसेंस निलंबित, दो दुकानों की बिक्री बंद, 41 कृषि केंद्रों को नोटिस और अब जीरो पोटाश वाला उर्वरक मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में आखिर कितने किसान पहले ही ऐसी खाद खरीदकर अपने खेतों में उपयोग कर चुके हैं। यदि यह अमानक उर्वरक बड़ी मात्रा में किसानों तक पहुंच चुका है तो इसका असर केवल इस सीजन की फसल पर नहीं, बल्कि किसानों की पूरी सालभर की आय पर पड़ सकता है।
कृषि विभाग ने केवल एक दुकान तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। एक अन्य उर्वरक विक्रय केंद्र की बिक्री भी प्रतिबंधित की गई है। इसके अलावा 10 अन्य उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान जांच अभियान और तेज किया जाएगा।
कृषि विभाग ने पिछले एक माह के दौरान लगातार निरीक्षण अभियान चलाया है। इस दौरान पुस्कल एग्रोटेक और बलराम कृषि केंद्र का लाइसेंस निलंबित किया गया। वहीं बोड़ला के गोलू कृषि केंद्र और पांडातराई के विजय ट्रेडर्स में अमानक उर्वरक पाए जाने पर बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
इसके अलावा स्टॉक पंजी का संधारण नहीं करना, नील बुक का अभाव, लाइसेंस प्रदर्शित नहीं करना और अन्य अनियमितताओं के कारण 41 कृषि केंद्र संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कबीरधाम जिले में उर्वरक कारोबार में नियमों के पालन को लेकर व्यापक लापरवाही सामने आ रही है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एमओपी उर्वरक में मौजूद पोटाश फसलों की जड़ों को मजबूत बनाने, पौधों की बढ़वार, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा दाना भराव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि खाद में पोटाश ही नहीं हो तो किसान चाहे जितनी मेहनत करें, फसल की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होना तय है। इससे किसानों को दोहरा नुकसान होता है।