
Chhattisgarh Monsoon Update: मानसून पहुंचा, लेकिन बारिश नहीं बढ़ी(photo-patrika)
Chhattisgarh Weather News: प्रदेश में इस साल मानसून की शुरुआत बेहद कमजोर रही है। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के बावजूद प्रदेश में व्यापक वर्षा नहीं हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) नहीं बनने के कारण भारी बारिश का सिस्टम सक्रिय नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में जो भी छिटपुट बारिश हो रही है, वह केवल द्रोणिका (ट्रफ लाइन) और अन्य स्थानीय प्रणालियों के कारण है। हालांकि, मौसम विभाग ने एक बार फिर 1 जुलाई से प्रदेश में व्यापक वर्षा और अगले एक सप्ताह तक कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
जून महीना बीतने में अब सिर्फ एक दिन शेष है, लेकिन प्रदेश में बारिश के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। जून में अब तक केवल 60.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 182.2 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी। यह सामान्य से 67 फीसदी कम है। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में बारिश का ग्राफ कम या बेहद कम की श्रेणी में है।
आमतौर पर जून महीने के 12 दिनों में भारी से अतिभारी बारिश होती है (9 दिन भारी, 2 दिन बहुत भारी और 1 दिन अतिभारी), लेकिन इस बार यह आंकड़ा शून्य रहा। प्रदेश में मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते दस्तक दी थी और 23 जून को यह रायपुर पहुंचा। इसके बावजूद एक सप्ताह बीतने के बाद भी मानसून पूरे प्रदेश में नहीं फैल सका है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में मानसून राज्य के बाकी हिस्सों को भी कवर कर लेगा।
Chhattisgarh Monsoon: आषाढ़ महीने के प्रवेश के साथ ही किसानों की चिंताएं गहरी हो गई हैं। पानी नहीं गिरने के कारण राज्य में अब तक लक्ष्य के मुकाबले केवल 3 से 4 फीसदी ही बुआई हो सकी है। इस साल सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी का लक्ष्य रखा है। कम बारिश के संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखे से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कृषि विभाग ने किसानों को कम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
इसके साथ ही धान के बदले मक्का, कोदो, कुटकी, रागी जैसी कम पानी वाली फसलों और दलहन-तिलहन को अंतरवर्तीय (इंटरक्रॉपिंग) फसल के रूप में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार ने राज्य बीज निगम को 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज सुरक्षित रखने और बीमा कंपनियों के साथ समन्वय बनाकर फसल नुकसान की भरपाई का प्रभावी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डुमकी (खुटीपारा) में सोमवार शाम करीब 4:30 बजे आकाशीय बिजली गिरने से दो मासूम बच्चों समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक बालिका झुलस गई। घटना के वक्त तेज हवा-तूफान के बीच प्राइमरी स्कूल परिसर में तीन बच्चे पेड़ से गिर रहे आम बीन रहे थे। इसी दौरान अचानक गिरी गाज की चपेट में तीनों बच्चे और पास ही मवेशी चरा रहा एक युवक आ गया। हादसे में रामसाय (35 वर्ष), सागर (5 वर्ष) और रानी (14 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सागर की बड़ी बहन श्रद्धा (9 वर्ष) गंभीर रूप से झुलस गई, जिसे अस्पताल दाखिल कराया गया है।
छत्तीसगढ़ में खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 3 से 4 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखे से निपटने की भी तैयारियों पर फोकस कर दिया है। कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने को कहा है।
उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।
जिले वर्षा कमी
बिलासपुर: 18.1 88%
राजनांदगांव: 25.8 86%
मनेंद्रगढ़: 27.7 84%
कोरिया: 28.4 83%
कोरबा: 30.9 82%
रायपुर: 40.3 74%
Updated on:
30 Jun 2026 10:49 am
Published on:
30 Jun 2026 10:28 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
