
कोच्चि। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक टीजी मोहनदास को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर गोलीबारी की वकालत करने के मामले में रविवार को मत्तनचेरी स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर क्राइम पुलिस की एक टीम उनके आवास पर पहुंची और तलाशी के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को लेकर भड़काऊ टिप्पणी करने के बाद मोहनदास के खिलाफ तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो में कहा था कि अगर उन्हें मौका मिलता तो वह प्रदर्शन में शामिल लोगों को गोली मार देते। उन्होंने यह भी कहा था कि जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू लगा देना चाहिए और प्रदर्शनकारियों को तीन चेतावनी देने के बाद पुलिसकर्मियों को गोलीबारी शुरू कर देनी चाहिए।
मोहनदास ने कहा था कि कुछ प्रदर्शनकारी भाग जाते, जबकि कुछ मारे जाते और कुछ दिव्यांग हो जाते। इसके बाद चार घंटे के भीतर स्थिति शांत हो जाती। उन्होंने शवों को एकत्र कर अस्पताल ले जाने की बात भी कही थी। एक अन्य वीडियो में उन्होंने प्रदर्शन में शामिल महिलाओं पर भी अभद्र टिप्पणियां की थीं। तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने उनके खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर 29 जुलाई को मामला दर्ज किया था।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की दंगा भड़काने और सामाजिक उपद्रव फैलाने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और केरल पुलिस अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। शिकायतकर्ताओं में ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के टीटी जिस्मन भी शामिल हैं। कई शिकायतकर्ताओं ने मामला दर्ज करने में पुलिस की ओर से हुई देरी पर भी आपत्ति जताई थी। इस दौरान मोहनदास के खिलाफ शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ती गई। उनकी टिप्पणियों से जुड़े वीडियो अब भी यूट्यूब पर मौजूद हैं।
इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मोहनदास की टिप्पणी से किनारा कर लिया है। संघ के दक्षिण केरलम प्रांत सह कार्यवाह केबी श्रीकुमार ने कहा कि हालिया प्रदर्शन को लेकर मोहनदास की टिप्पणी उनके निजी विचार हैं। उन्होंने कहा कि मोहनदास किसी भी स्तर पर संघ से जुड़े हुए नहीं हैं। संघ उनके बयान से सहमत नहीं है और ऐसे विचारों की पुरजोर निंदा की जानी चाहिए।