
कोलकाता। पूर्व बर्दवान जिले से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध सदस्य हमीम मंडल से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों को कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार हमीम मंडल केवल मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सार्वजनिक कार्यक्रमों और गतिविधियों पर नजर नहीं रखता था, बल्कि उसने चिनार पार्क स्थित मुख्यमंत्री के आवास की भी रेकी की थी। जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर आरोपी को मुख्यमंत्री को निशाना बनाने की साजिश के तहत सुरक्षा व्यवस्था में कमजोर स्थानों और बिना निगरानी वाले क्षेत्रों की पहचान करने का काम सौंपा गया था।
इसके लिए वह संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपी और उसके सहयोगियों ने लगातार निगरानी रखने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के चिनार पार्क स्थित आवास के आसपास किराए पर मकान लेने की संभावनाएं भी तलाशी थीं। इसके अलावा पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क ने राज्य सचिवालय नवान्न के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था की भी निगरानी की थी। हमीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
उसके संपर्कों, स्थानीय सहयोगियों और अन्य राज्यों में मौजूद नेटवर्क की जांच की जा रही है। कथित साजिश की पूरी जानकारी सामने लाने के लिए जांच एजेंसियां जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, वित्तीय लेन-देन और स्थानीय स्तर पर मिले सहयोग की भी पड़ताल कर रही हैं। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस कथित नेटवर्क से जुड़े लोग सरकारी परिसर के आसपास मौजूद थे या नहीं और उनकी गतिविधियां किस प्रकार की थीं इन बातों का पता लगाने के लिए अब राज्य सचिवालय नवान्न क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। पूछताछ और फॉरेंसिक जांच जारी रहने के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
पूछताछ के दौरान हमीम मंडल ने बताया कि उसे पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी-अपराधी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) की ओर से युवतियों को अपने नेटवर्क से जोड़ने का जिम्मा दिया गया था। जांच सूत्रों के मुताबिक उसकी भूमिका शुरुआती स्तर पर महिलाओं की पहचान कर उनका संपर्क पाकिस्तान में बैठे एसबीएन हैंडलर्स से कराने तक सीमित रहती थी। एक बार संपर्क स्थापित होने के बाद हैंडलर्स सीधे उन महिलाओं से बातचीत करने लगते थे और हमीम मंडल की भूमिका समाप्त हो जाती थी। अधिकारियों का कहना है कि अर्पिता सरकार के मामले में भी इसी तरीके का इस्तेमाल किया गया था।