CG Politics: महिला आरक्षण को लेकर राजनीति गरमाई। लता उसेंडी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को ऐतिहासिक बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा, BJP ने देशभर में अभियान तेज किया।
CG Politics: छत्तीसगढ़ समेत देशभर में महिला आरक्षण को लेकर सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। लता उसेंडी ने प्रेसवार्ता के दौरान विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारित यह कानून देश की आधी आबादी को राजनीति में बराबरी का अवसर देने वाला है, लेकिन विपक्ष इसके क्रियान्वयन में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है।
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है, जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर महिलाओं को इस कानून और सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक करेंगे। उसेंडी ने कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक पहल है।
प्रेसवार्ता में उसेंडी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य दल महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, विपक्ष की मंशा महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण से दूर रखने की है।
उसेंडी ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं को महिलाओं के सशक्तिकरण का आधार बताते हुए कहा कि
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का सीधा लाभ महिलाओं तक पहुंचा है और भाजपा कार्यकर्ता अब इनकी जानकारी घर-घर पहुंचाएंगे।
उसेंडी ने लोकसभा सीटों के निर्धारण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सीटें 1971 जनगणना के आधार पर तय हैं, जबकि देश की आबादी अब सवा अरब से अधिक हो चुकी है। ऐसे में 33% महिला आरक्षण लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए उसेंडी ने कहा कि “देश की आधी आबादी के साथ कांग्रेस ने हमेशा धोखा किया है।” उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल के विरोध से कांग्रेस का “महिला विरोधी चेहरा” उजागर हो गया है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और विपक्ष की भूमिका को उजागर करेगी।
भाजपा ने इस मुद्दे को और धार देने के लिए बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। उसेंडी ने बताया कि 30 अप्रैल तक ग्राम पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों में कांग्रेस के खिलाफ “निंदा प्रस्ताव” पारित कर राष्ट्रपति को भेजे जाएंगे। यह अभियान पार्टी के जमीनी स्तर पर आक्रामक रुख को दर्शाता है।
महिला आरक्षण का मुद्दा केवल कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बन सकता है। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन के समय और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा किस तरह से सियासी समीकरणों को प्रभावित करता है और क्या वास्तव में यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नए स्तर तक पहुंचा पाता है।