
कोरबा . छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के प्रांतीय आवाहन पर कोरबा जिले के विधानसभा क्षेत्र कोरबा, पाली तानाखार, कटघोरा और रामपुर में शिक्षाकर्मी सभा का आयोजन किया।
शिक्षक पंचायत निकाय मोर्चा के जिला संचालक मनोज चौबे ने बताया कि हमारी मांगो पर शासन द्वारा बनाई गई कमेटी द्वारा अब तक रिपोर्ट न सौंपे जाने व शासन द्वारा तत्संबंध मे अब तक निर्णय न ले पाने से नाराज कोरबा जिले के शिक्षा कर्मियो का संविलियन संकल्प सभा चारों विधानसभाओं मे 26 मई को आयोजित हुआ। जिले के शिक्षाकर्मी शासन के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए संविलियन के लिए संकल्प लिए।
कोरबा विधानसभा शिक्षक सदन में पाली-तानाखार विधानसभा में सामुदायिक भवन, पोड़ीउपरोड़ा, कटघोरा विधानसभा गायत्री धर्मशाला, बेसिक स्कूल के पास,कटघोरा और रामपुर विधानसभा क्षेत्र में पत्रकार भवन, बरपाली में आयोजित होना है । जिसमे जिले के पाँचों विकास खंड के सभी शिक्षक (पं./ननि) साथी अपने अपने विधानसभा के सभा में शामिल हुए।
मोर्चा के प्रांतीय उपसंचालक ओम प्रकाश बघेल, प्रमोद सिंह राजपूत, कुमारी यशोधरा पाल विशेष उपस्थित हुए। कोरबा विधानसभा को ओम प्रकाश बघेल प्रांतीय उपसंचालक,
पाली तानाखार विधानसभा को प्रमोद सिंह राजपूत प्रदेश उपसंचालक, कटघोरा विधानसभा को मनोज चौबे जिला संचालक, रामपुर विधानसभा को नित्यानंद यादव जिला संचालक सहित जिले के कई शिक्षाकर्मी सभा को संबोधित किया। शाला प्रवेश उत्सव का बहिष्कार जैसे निर्णय लेकर उग्र आंदोलन की तैयारी की जाएगी।
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बालको का वीआरएस विवाद पहुंचा श्रम आयुक्त के पास
कोरबा. वीआरएस को लेकर बालको में श्रमिक संगठन और प्रबंधन आमने सामने हैं। इंटक समर्थित भारत अल्यूमिनियम मजदूर संघ मामले को लेकर श्रम आयुक्त के समक्ष पहुंचा है। इसमें स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति के नाम पर कर्मचारियों को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया गया है।
इसे सहायक श्रम आयुक्त ने संज्ञान लिया है। चर्चा के लिए दोनों पक्षों को बुलाया है। सहायक श्रम आयुक्त की मध्यस्थता दोनों के बीच 28 मई को दोपहर दो बजे बातचीत हो सकती है।
इसके लिए सहायक श्रम आयुक्त ने बालको के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और भारत अल्यूमिनियम मजदूर संघ इंटक को नोटिस देकर बुलाया है। बालको को जारी नोटिस में कहा गया है कि इंटक ने स्वेच्छिक सेवा निवृत्ति के नाम पर कर्मचरियों को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया है। इसका हल जरूरी है।
इंटक नेता जय यादव ने बालको प्रबंधन पर आरोप लगाया कि वीआरएस की आड़ में कर्मचारियों को प्रताडि़त किया जा रहा है। दबाव बनाने के लिए कंपनी ने करीब 100 कर्मचारियों को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
जबकि फैक्ट्री एक्ट के तहत कर्मचारियों का पहले पीएमई किया गया था। इसमें सभी योग्य पाए गए थे। कंपनी ने कुछ कर्मचारियों का तबादला दक्षिण भारत कर दिया है। ताकि परेशान होकर कर्मचारी वीआरएस ले सके।