
Cyber Fraud: ऊर्जाधानी के लोगों से साइबर के सहारे ठगी करने वालों गिरोह का मायाजाल तेजी फैल रहा है। स्थिति यह है कि कोरबा देशभर के ठगों के लिए अब बड़ा गढ़ बन गया है। जिले में दो साल में साइबर ठगी से संबंधित ढेरों शिकायतें पुलिस तक पहुंची है। इसे नियंत्रित करने के लिए कोरबा पुलिस ने साइबर जागरुकता अभियान भी चलाया है। बावजूद इसके ठगी को रोकना पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। हर साल कोरबा में ऑनलाइन साइबर ठगी से संबंधित करीब डेढ़ दर्जन मामले दर्ज होते हैं। समय पर सूचना मिलने से कई बार रुपए लौटवाने में पुलिस को कामयाबी भी मिली है। इसके बावजूद साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों पर नकेल कसना कोरबा पुलिस के लिए चुनौती बन गई है।
पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरुक होना बेहद जरुरी है। उन तकनीकों की जानकारी भी बेहद आवश्यक है, जिसकी मदद से लोगों से ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। यह भी जानने की जरुरत है कि ठगी होने पर कब, कैसे और किससे सम्पर्क किया जाए?
साइबर ठगी का पता चलते ही लोगों को 1930 पर कॉल करके सूचना देनी चाहिए। ठगी की घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस टॉल फ्री नंबर को जारी किया गया है। इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू किया गया है। इस पर भी लॉगिन करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
एडवांस सैलरी लेेने की चाहत में सीएएफ का जवान 8.5 लाख रुपए की धोखाधड़ी का शिकार हो गया। हवलदार रथराम सिदार ने मोबाइल में सैलरी एडवांस एप इंस्टॉल किया। थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति का कॉल आया। कॉलर ने रथराम को बताया कि उनके खाते में गलती से 10 लाख रुपए चला गया है। इसे लौटाए बिना एडवांस में सैलरी नहीं मिलेगी। तब रथराम ने बैंक पहुंचकर संबंधित व्यक्ति द्वारा बताए गए नंबर पर आठ लाख 50 हजार भेज दिया। रथराम को एडवांस में सैलरी नहीं मिली।
कोरबा एरिया से सेवानिवृत्त एसईसीएल कर्मी सोमेन कुमार विश्वास से ठगों ने तीन लाख 85 हजार रुपए ठग लिया। सोमेन निहारिका क्षेत्र में एक दुकान खेल रहे हैं। गर्म कपड़े लेने के सिलसिल में लुधियाना गए थे। वहां से कोरबा लौटने पर सोमेन के मोबाइल पर एक कॉल आया। इसमें कॉलर ने खुद को नाम सौरभ बताया। सोमेन को लगा कि सौरभ कपड़ा कारोबारी है, जिससे उनकी मुलाकात लुधियाना में हुई थी। सोमने ने तीन लाख 85 हजार रुपए डाल दिया।
समय के साथ ठगी का तरीका भी बदल रहा है। पहले ठगों का गिरोह बैंक अधिकारी बनकर मोबाइल फोन के जरिए लोगों से सम्पर्क करता था। अब ठगी यह तकनीक पुराना पड़ गया है। ठगों ने नौकरी या अन्य कार्यों के लिए प्रलोभन भरा संदेश मोबाइल फोन पर लिंक भेजते हैं। लालच में फंसकर कोई व्यक्ति लिंक को क्लीक करता है। यह लिंक एक कम्प्यूरकृत प्रोग्राम से जुड़ा होता है। जैसे ही व्यक्ति एक दो रुपए लिंक जरिए पेमेंट करता है। उसके खाते से उतनी राशि निकल जाती है जिसका कम्प्यूटरकृत प्रोग्राम में ठग डाले रहते हैं। आजकल सबसे अधिक ठगी इसी तकनीक के जरिए हो रही है।
डिजिटल अरेस्ट: डिजिटल अरेस्ट ठगी का एक तरीका है। इसमें ठगों का गिरोह खुद को ईडी या सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों से होना बताकर लोगों को डराता धमकाता है। उनसे मोबाइल हैंडसेट में जीपीएस लोकेशन को ऑनकराता है। लोगों को अपनी निगरानी में रखता और खुद को अफसर बताकर रुपए की मांग करता है। पिछले साल कोरबा में भी एक डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट करने का मामला सामने आया था। ठगों का गिरोह रुपए को म्यूल खाते में डलता और इसे बाद में निकाल लेता है। म्यूल खाते एक तरह से नकली खाते होते हैं, जिसे गिरोह भाड़े पर लेकर कारोबार करता है।
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यौन उत्पीड़न: हाल ही में कोरबा साइबर सेल तक ऐसे शिकायतें पहुंची है, जिसका संबंध यौन उत्पीडऩ से है। इसमें ठगों का गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल साइट पर किसी सुंदर महिला की तस्वीर पोस्ट करते हैं। सुंदरता को देखकर कोई व्यक्ति फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लेता है तब ठगों का काम शुरू होता है। ठग महिला से फेसबुक या इंस्टाग्राम के मैसेजर पर चेटिंग कराने लगते हैं। इस दौरान संबंध बनाने के लिए भी प्रलोभन दिया जाता है। जैसे ही व्यक्ति इसके लिए तैयार होता है ऑनलाइन वीडियो ठगों का गिरोह बना लेता है। व्यक्ति को ब्लैकमेलिंग करता है। रुपए की मांग की जाती है। वीडियो को वॉयरल करने की धमकी दी जाती है।