कोरबा

Video- केन्द्र की भाजपा सरकार मजदूरों पर एक-एक कर बड़ा हमला कर रही : रमेन्द्र कुमार

- एटक चलाएगा 40 दिवसीय जागरूकता अभियान

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Jul 15, 2018
'फिक्स टर्म इंप्लायमेंट' मजूदरों पर सरकार का सबसे बड़ा हमला, जानें क्या है फिक्स टर्म इंप्लायमेंट

कोरबा. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेन्द्र कुमार ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार मजदूरों पर एक-एक कर बड़ा हमला कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगोंं को निजी हाथों में सौंपने पर अमादा है। फिक्स टर्म इंप्लायमेंट की घोषणा से मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ऐसे मजदूरों को न तो भविष्य निधि राशि मिलेगी न ही एरियर्स। पेंशन के हकदार भी नहीं होंगे।

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कोरबा प्रवास के दौरान रविवार को रमेन्द्र कुमार एटक के कार्यालय में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज मजदूर सबसे अधिक असुरक्षित है। न तो सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है न ही कार्य के अनुसार वेतन। केन्द्र सरकार की फिक्स टर्म इंप्लायमेंट पॉलिसी ने मजदूरों की परेशानी बढ़ा दी है। इसका मतलब है मजदूर को एक निश्चित अविध के लिए काम मिलेगा। काम खत्म नौकरी खत्म। इसके लागू होते ही मजदूर सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो जाएंगे। केन्द्र सरकार सार्वजनिक उद्योगों पर हमला कर रही है। इससे कोयला उद्योग भी अछूता नहीं है। कमर्शियल माइिनंग का विरोध एटक शुरू से करता रहा है। आगे भी विरोध जारी रखेगा।

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उन्हेंने कहा कि केन्द्र सरकार के जन विरोधी कार्यों को लोगों तक पहुंचाने के लिए एटक ने मजदूर बचाओ, देश बचाओ का नारा दिया है। इसके लिए एक जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। नौ अगस्त से इसकी शुरूवात देशभर में होगी, जो १८ सितंबर तक जारी रहेगा। इस अविध में एटक के सदस्य रैली, पोस्टर, आमसभा आदि के जरिए सरकारी की पोल खोलेंगे। चर्चा के दौरान कामरेड आरडीसीपी राव अध्यक्ष राज्य एटक, हरिनाथ सिंह महासचिव राज्य एटक, हरिद्वार सिंह महासचिव एसकेएमएस और दीपेश मिश्रा उपस्थित थे।

कोरबा में हुई राज्य काउंसिल की बैठक
इसके पहले एटक के राज्य काउंसिल की बैठक कोरबा एरिया में हुई। इसमें देश के समक्ष वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा किया गया। दक्षिण पंथी संकट बताया गया। श्रम अधिकारी पर हमला, नव उदारवाद के आर्थिक एवं सामाजिक परिणाम पर भी चर्चा की गई।

स्टैंडराइजेंशन की बैठक में कुछ नया नहीं
कोल इंडिया के स्टैंडराइजेशन की बैठक का बहिष्कार करने पर भी रमेन्द्र कुमार ने अपनी बातें रखी। बताया कि स्टैंडराइजेशन से पहले चार मार्च २०१८ को दिल्ली में अपेक्स कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें एटक और सीटू, बीएमएस और एचएमएस से दो-दो यूनियन को शामिल करने की बात कही गई थी। बाद में प्रस्ताव को बदल दिया गया। सीटू और एटक से एक एक प्रतिनिधि शामिल किए। इसका बहिष्कार किया गया।
रमेन्द्र ने कहा कि स्टैंडराइजेशन कमेटी की बैठक में कुछ नया नहीं है। अपेक्स में बनी सहमति को दोहराया गया है। उन्होंने एचएमएस नेता नाथूलाल पांडे पर बीएमएस की गोद में बैठकर खेलने का आरोप लगाया है। कहा कि वेतन समझौते का बहिष्कार करने वाला एचएमएस स्टैंडराइजेशन की बैठक में पहुंच जाता है।

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Published on:
15 Jul 2018 07:47 pm
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