Coal India SECL performance: कोल इंडिया की प्रमुख सहायक कंपनी SECL ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोयला उत्पादन में बढ़त दर्ज की है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी अपने वार्षिक लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकी। 212 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले SECL 176.29 मिलियन टन उत्पादन पर सिमट गई।
SECL Coal Production 2025-26: कोल इंडिया की दूसरी सबसे बड़ी कोयला उत्पादन करने वाली कंपनी एसईसीएल ने पिछले बार से अधिक कोयला उत्पादन किया। लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-2026 में अपने सालाना लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकी। कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की मेगा परियोजनाएं बीते वित्तीय वर्ष में दिए गए अपने टारगेट को पूरा नहीं कर सके, इसके कारण एसईसीएल भी लक्ष्य पूरा नहीं कर सकी।
बीते वित्तीय वर्ष 2025-2026 में एसईसीएल ने वार्षिक लक्ष्य 212 मिलियन टन के मुकाबले 176.29 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। इस तरह एसईसीएल लक्ष्य से लगभग 36 मिलियन टन पिछड़ गई। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष 2024-2025 में हुए 167 मिलियन टन कोयला उत्पादन की अपेक्षा एसईसीएल ने इस बार 5.26 प्रतिशत यानि लगभग 8.8 मिलियन टन की ग्रोथ दर्ज की है। इसी तरह इस बार कोयला उठाव के लिए एसईसीएल को 220 मिलियन टन का टारगेट दिया गया था। इसमें कंपनी 178.61 मिलियन टन कोयले का उठाव कर सकी।
वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कोरबा जिले में स्थित खदानों को लगभग 162 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन एसईसीएल की कोरबा, कुसमुंडा, दीपका और गेवरा क्षेत्र की खदानों से 133 मिलियन टन कोयला ही कोयला उत्पादन हो सका है। जिले की खदानों की बदौलत एसईसीएल ने 212 मिलियन टन कोयला उत्पादन टारगेट के मुकाबले लगभग 176.29 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। यहां की मेगा परियोजनाओं के पिछडऩे का असर यह रहा कि एसईसीएल लक्ष्य पूरा नहीं कर सकी। कोरबा कोलफील्ड अंतर्गत जिले में एसईसीएल के चार क्षेत्रों से कोयला उत्पादन होता है। इसमें गेवरा विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कोयला खदान है, और एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट है।
वित्तीय वर्ष 2025-2026 में गेवरा खदान के लिए 63 मिलियन टन का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन इसके मुकाबले खदान में 55.8 मिलियन टन कोयला उत्पादन हुआ है। इसी तरह मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा को 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना था, लेकिन यहां 32.7 मिलियन टन कोयला उत्पादन हुआ है। इसी तरह मेगा प्रोजेक्ट दीपका में 40 मिलियन टन लक्ष्य के मुकाबले 37.5 मिलियन टन कोयला उत्पादन हुआ है। कोरबा क्षेत्र ने 8.87 मिलियन टन टारगेट के मुकाबले 7.4 मिलियन टन कोयला उत्खनन किया गया। इस तरह जिले की खदानों से लगभग 162 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 133 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया गया है।
एसईसीएल के कोरबा क्षेत्र में मानिकपुर और सराईपाली खुली खदान के अलावा भूमिगत खदानों से कोयला उत्पादन होता है। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कोरबा क्षेत्र में मानिकपुर खुली खदान को छोड़ अन्य सभी खदान उत्पादन से पिछड़ गए हैं। मानिकपुर खदान ने 5.25 मिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य पूरा कर लिया। जबकि कोरबा क्षेत्र की दूसरी खुली खदान सराईपाली से 2.1 एमटी की अपेक्षा 1.83 एमटी कोयला उत्खनन हुआ है। इसी तरह कोरबा क्षेत्र की भूमिगत खदानों का भी उत्पादन में योगदान रहा। यहां भूमिगत खदानों से 3 लाख 18 हजार 820 टन कोयला उत्पादन किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कोल इंडिया का भी टारगेट पूरा नहीं हो सका। कोल इंडिया ने 875 मिलियन टन के मुकाबले 768.11 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। जबकि इसके पूर्व वित्तीय वर्ष 2024-2025 में इससे अधिक 781.06 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया गया था। वहीं कोल इंडिया के सहायक कंपनियों की बात करें तो एनसीएल को छोड़ अन्य सभी कंपनियां अपना वार्षिक लक्ष्य पूरा नहीं कर सके।
एसईसीएल प्रबंधन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कंपनी ने उत्पादन, प्रेषण और ओबीआर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। ऐसा करने वाली एसईसीएल सीआईएल की एकमात्र कंपनी है। सीएमडी हरीश दुहन ने कहा कि तीनों क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों की मेहनत का नतीजा है।
जिले में एसईसीएल की कोयला खदानों के उत्पादन से पिछडऩे की बड़ी वजह जमीन मिलने में देरी और मानसून रही। भूविस्थापितों के रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास संबंधी समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं होने के कारण अधिग्रहित क्षेत्र में समय पर उत्पादन शुरू करने में देरी हो रही है। बार-बार भूविस्थापितों का विरोध भी झेलना पड़ रहा है। दूसरी ओर मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश के कारण कई माह तक उत्पादन प्रभावित रहा, जिसके कारण लक्ष्य के अनुसार कोयला उत्पादन में कंपनी पीछे हो गई है।