
कोरबा . लक्ष्मणबन मोहल्लावासियों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। दो साल से घर के नलों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सार्वजनिक नल टूटे हुए हैं। नल नाली से सटी हुई है। पानी भरने के लिए लोगों को नाली में बर्तन रखकर पानी भरना पड़ता है। इससे बीमारी का खतरा बना हुआ है।
नगर निगम अंतर्गत वार्ड ११ के लक्ष्मणबन मोहल्ला में घर में नल लगाए गए हंै, लेकिन नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है। मजबूरन लोग सार्वजनिक नलों से भरते है। ये नल भी लगभग दो साल से टूटे हुए हंै। उसकी ऊंचाई भी कम हो गयी है। नल गंदी नाली से सटी हुई है। महिलाएं स्वच्छता को दरकिनार कर गंदी नाली में बर्तन रखकर पानी भर रहीं है। ऐसे में नाली के सूक्ष्म कीटाणु पीने के पानी में जाने की संभावना रहती है। वहीं गंभीर बीमारी की जद में आने का खतरा बना हुआ है।
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नल में पानी का स्रोत काफी कम है। लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। मोहल्लवासियों ने बताया कि पानी के दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। नल में कभी पानी आता है तो कभी नहीं। नल से पानी भी इतना कम आता है कि सभी को पर्याप्त पानी भी नहीं मिलता है। यह सिलसिला लगभग दो साल से चला आ रहा है। इसकी शिकायत जनप्रतिनधि व अधिकारियों से की गई। इसके बाद भी पानी की मूलभूत समस्या से जुझना पड़ रहा है।
अब बारिश ने भी दस्तक देने वाली है। बारिश के मौसम में मोहल्ले का गंदा पानी व बारिश के पानी से नालियां उफान पर रहेंगी। नल नाली से सटी होने के कारण नाली का गंदा पानी पाइप में चली जाएगी और उसी गंदे पानी को लोग पीने को मजबूर होंगे।
नहीं पहुंचा पानी, भटकते रहे लोग
सोमवार की सुबह मोहल्ले में नल में पानी नहीं आने से लोग भटकते रहे। शाम को नल में पानी आने के बाद नलों में बर्तनों की कतार लगी रही। आवक कम होने के कारण पर्याप्त पानी नहीं मिला। सड़क के मुख्य मार्ग के लोगों को दूसरे मोहल्ले पानी के लिए दौड़ लगनी पड़ती है, वहीं स्त्रोत कम होने के कारण आपस में झूमा-झपटी व विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। हांलाकि निगम द्वारा पेयजल के लिए कभी-कभी टैंकर उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन यह सिर्फ औपचारिक विकल्प है। इस समस्या से लोगों को रोज जूझना पड़ता है।
मोहल्ले में दो बोरिंग, दोनों बेहाल
मोहल्ले में पानी आपूर्ति के लिए दो बोरिंग लगाए गए हैं। एक बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं है। इस पानी का उपयोग क्षेत्रवासी निस्तारी के लिए उपयोग करते हैं। वहीं दूसरा बोरिंग काफी दिनों से खराब पड़ी है। गर्मी में लोग पानी को तसरते रहे, लेकिन बोरिंग नहीं बनी।