कोटा

महंत देवानंद हत्याकांड: मर्डर की साजिश में शामिल पुरातत्व विभाग का कर्मचारी सस्पेंड, 2 साल बाद होना था रिटायर

Mahant Devanand Maharaj Murder Case: कोटा के चर्चित महंत देवानंद हत्याकांड की साजिश में शामिल पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के आरोपी कर्मचारी महावीर पारेता को निलंबित कर दिया है। आरोपी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति में महज 2 साल का ही समय शेष था।

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Jun 19, 2026
Mahant Devanand Maharaj
महंत देवानंद महाराज की फाइल फोटो: पत्रिका

Archaeology And Museums Department Action: कोटा के चर्चित महंत देवानंद हत्याकांड में नया मोड़ सामने आया है। मामले में साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के कर्मचारी महावीर पारेता को विभाग ने निलंबित कर दिया। पुलिस जांच में उसकी हत्या की साजिश में शामिल होने का खुलासा होने के बाद ये कार्रवाई की। विभाग ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर निलंबन आदेश जारी कर दिए।

स्मारक प्रचारक (चौकीदार) के पद पर था कार्यरत

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीक्षक हेमेंन्द्र अवस्थी ने बताया कि महावीर पारेता विभाग में स्मारक प्रचारक (चौकीदार) के पद पर कार्यरत था। पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी और जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी विभागीय अधिकारियों को भेजी थी। इसके बाद निदेशक स्तर पर विचार-विमर्श कर उसे निलंबित करने का निर्णय लिया गया।

2 साल बाद होना था सेवानिवृत्त

सीआई अनिल कुमार टेलर ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि वारदात से करीब चार दिन पहले महावीर पारेता और उसके सहयोगियों ने मुख्य आरोपियों को चन्द्रेसल मठ बुलाकर वहां की रैकी करवाई थी। इस दौरान आरोपियों को महंत देवानंद महाराज की दिनचर्या, मठ के कमरों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और आने-जाने के रास्तों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। पुलिस का मानना है कि इसी जानकारी के आधार पर पूरी वारदात की योजना तैयार की गई।

पुलिस जांच के अनुसार महावीर पारेता की सेवानिवृत्ति में महज दो साल का समय बाकी था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने मठ की गतिविधियों और व्यवस्थाओं से जुड़ी कई अहम जानकारियां मुख्य आरोपियों तक पहुंचाई थीं, जिससे उन्हें वारदात को अंजाम देने में मदद मिली। वह हत्या के मामले में शामिल था। जांच के दौरान यह खुलासा भी हुआ कि हत्या के बाद पूरे मामले को लूट और डकैती का रूप देने की तैयारी की गई थी। आरोपियों ने मुख्य हमलावरों को सुझाव दिया था कि मठ की तिजोरी में तोड़फोड़ कर नकदी निकाल ली जाए और परिसर के बाहर खड़े वाहन को आग के हवाले कर दिया जाए ताकि पुलिस का ध्यान वास्तविक कारणों से हटकर लूटपाट की ओर चला जाए।

इसके अलावा नंदनवन के कमरे की कुंडी बाहर से बंद करना भी साजिश का हिस्सा था। पुलिस के अनुसार ऐसा इसलिए किया गया ताकि घटना के बाद किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर संदेह न हो और जांच की दिशा भटकाई जा सके। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है।

Published on:
19 Jun 2026 12:00 pm