
कोटा. केन्द्र सरकार ( Central government ) की ओर से 2022 तक किसानों की आय दोगुनी ( farmers income double ) करने की दिशा में राज्य सरकार (Rajasthan government ) ने भी काम करना शुरू कर दिया है। किसानों ( farmers ) की आय को कृषि के साथ पशुधन ( cattle stock ) से जोडऩे पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार भी प्रदेश में नया अधिनियम लागू करने की तैयारी में है। ( Rajasthan Agricultural Produce Market Act ) इसमें किसानों को उनकी आय के अच्छे दाम दिलाने के प्रावधान किए जा रहे हैं। साथ ही, मंडियों में कर्ज के कारण व्यापारियों के अचानक भागने से किसानों और आढ़तियों की रकम नहीं डूबे इसके प्रावधान भी किए गए हैं। ( Fraud with farmers )
प्रदेश में राज्य कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 एवं मॉडल एपीएलएम एक्ट 2017 की जगह राजस्थान राज्य कृषि उपज एवं पशुधन मंडी (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम 2019 लागू करने की तैयारी है। इस एक्ट का मसौदा जारी कर दिया गया है। प्रदेशभर के किसानों और व्यापारियों से नए अधिनियम पर रायशुमारी की जा रही है। पिछले सप्ताह जयपुर में कृषि विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में अधिनियम के प्रावधानों पर चर्चा हुई। इसमें निजी मंडियां खोलने और ई-नाम योजना के प्रावधानों का सरलीकरण करने पर जोर दिया गया है।
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माल खरीदा और लापता हो गए व्यापारी
कोटा संभाग में पिछले पांच साल में आधा दर्जन से अधिक ऐसे मामले सामने आए, जिनमें व्यापारियों ने किसानों का लाखों रुपए का माल खरीदा और लापता हो गए। किसान अब पुलिस और अदालतों के चक्कर लगाने को विवश हैं। भामाशाहमंडी, इटावा मंडी, सांगोद, अकलेरा, बारां और बूंदी में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।
नए प्रावधानों में व्यापारियों के लिए ओवर ट्रेडिंग (अधिक व्यापार) को रोकने का प्रावधान जरूरी है। इसमें व्यापारी की मंडी समिति में जो सुरक्षा निधि या बैंक गारंटी जमा है, उसे जब्त कर संबंधित किसान और आढ़तियों को भुगतान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि कई बार कर्ज के कारण फर्म भाग जाती है। इससे किसानों और आढ़तियों का पैसा डूब जाता है और मंडी की प्रतिष्ठा भी खराब होती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए एक्ट में यह प्रावधान किया जा
रहा है।
मंडी में एमएसपी से कम नहीं बिकेगा माल
नए अधिनियम के माध्यम से सरकार चाहती है कि मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे किसानों की जिन्स नहीं बिके। अत: सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित समर्थन मूल्य से कम क्रय-विक्रय रोकने के उपाय किए जाएंगे। अभी मंडी में अस्सी फीसदी माल एमएसपी से नीचे बिकता है। इससे किसानों को भारी नुकसान होता है।
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पशुधन मंडी को शामिल किया
राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 में पशुधन मंडी का कोई प्रावधान नहीं है। मॉडल एक्ट में पशुधन मंडी नाम को शामिल किया गया है। नए अधिनियम में राजस्थान राज्य कृषि उपज एवं पशुधन मंडी (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम 2019 में इसे शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि पशुधन से किसानों को करीब 25 प्रतिशत आय होती है। लेकिन नियमित बाजार नहीं होने से किसान को इनके क्रय-विक्रय में आर्थिक हानि होती है। अत: पशुधन को एक्ट में शामिल किया जाना प्रस्तावित है।
सरकार के साथ नए अधिनियम को लेकर चर्चा हो चुकी है। प्रदेशभर के किसान संगठनों ने सुझाव दिए हैं। निश्चित रूप से नए प्रावधान किसान हितैषी साबित होंगे।
दशरथ कुमार, किसान नेता
मंडियों के मॉडल एक्ट के बारे में व्यापारियों से रायशुमारी हो चुकी है। प्रावधानों के बारे में सरकार को सुझाव दिए जा चुके हैं।
अविनाश राठी, अध्यक्ष कोटा गे्रन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट्स एसोसिएशन