
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बुधवार को सामान्य से सात दिन देरी से राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में प्रवेश कर लिया। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है। अगले दो से तीन दिनों में इसके राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की प्रबल संभावना है। इससे किसानों और आम लोगों को लंबे समय से चल रही उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग में अगले पांच से सात दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहने तथा पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में कई स्थानों पर भारी से अतिभारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी आगामी दिनों में आंधी और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। सड़क, रेल और बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
इधर, कोटा शहर में बुधवार को बादल छाए रहे, लेकिन उमस भरी गर्मी का असर कम नहीं हुआ। हालात यह रहे कि दोपहर के समय कूलर-पंखों की हवा भी बेअसर रही। शाम ढलने के बावजूद उमस का जोर बना रहा। लोग बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे है। हालांकि तापमान में गिरावट दर्ज की गई। कोटा का अधिकतम तापमान 1 डिग्री गिरकर 35.1 व न्यूनतम तापमान 2 डिग्री गिरकर 26.6 डिग्री सेल्सियस रहा। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में तेज बारिश से तापमान में और गिरावट आएगी।
रावतभाटा में बुधवार रात और गुरुवार तड़के मूसलाधार बारिश का दौर चला। करीब दो घंटे हुई बारिश के बाद गर्मी से राहत मिली। शहर में पहली मानसूनी बारिश ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। रावतभाटा-कोटा मार्ग पर जलभराव हुआ। यहां सड़कें व डिवाइडर पानी में डूब गए। उपखण्ड में कई इलाकों में पेड़ भी गिरे। पहली मानसून बारिश से राणा प्रताप सागर बांध में 4 हजार 211 क्यूसेक पानी की आवक हुई। बांध के नियंत्रण कक्ष के अनुसार राणाप्रताप सागर कैचमेंट में सुबह 8 बजे तक 11.20 मिमी बारिश दर्ज की गई। जवाहर सागर में 5.40 मिमी और गांधीसागर में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई। सांगोद कस्बे में छितराई बारिश हुई। इस बारिश से बांधों के जलस्तर में सुधार होने की संभावना भी बढ़ गई है।