कोटा

25 वर्षों से थैलेसीमिक बच्चों की मुस्कान बने हुए है नवीन तोतलानी

समाजसेवी नवीन तोतलानी 25 वर्षों से थैलेसीमिक बच्चों के लिए निरन्तर रक्तदान शिविर लगवा कर थैलेसीमिक बच्चों की मुस्कान बने हुए है।
2 min read
• •
Updated: 23 Dec 2017, 12:55 PM IST
Thalassemia, thalassemic children, social work, blood donation camp, MBS hospital, Thalassemia Society, Thalesimic Day Care Ward, JK Lone Hospital, Blood Bank, City Pride, Christmas, Santa, Kota, Kota Patrika, Kota Patrika News, Rajasthan Patrika
नवीन तोतलानी

कोटा . मन में किसी जरूरतमंद की सेवा करने का जज्बा हो तो कदम कभी रुकते नहीं। स्टेशन क्षेत्र में समाजसेवी नवीन तोतलानी 25 वर्षों से थैलेसीमिक बच्चों के लिए निरन्तर रक्तदान शिविर लगवा कर इसे चरितार्थ कर रहे हैं। जुलाई 1999 में वे एक रोगी को लेकर एमबीएस हॉस्पिटल पहुंचे। वहां ब्लड बैंक पर बोर्ड लगा था, 'यहां थैलेसीमिक बच्चों को रक्त मिलता है।' इसे पढ़कर जिज्ञासा हुई तो थैलेसीमिया सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. पीपी गुप्ता व सचिव सुनील जैन से मिले, तब यहां 125 बच्चों को 15 दिन में रक्त की जरूरत पड़ती थी। एेसे में उन्होंने स्टेशन क्षेत्र में पहले शिविर में इन बच्चों के लिए 29 यूनिट रक्त एकत्र किया, फिर सिलसिला आगे बढ़ता गया। प्रत्येक शिविर से नेगेटिव गु्रप की सूची बनाने लगे। इससे माह में 2 बार ब्लड बैंक में ही रक्त मिलना शुरू हो गया। नवीन की लगन देखा पत्नी भी इनके साथ बच्चों के वास्ते रक्त सेवा के मिशन में 2006 से इनके साथ हो गई।

डे-केयर वार्ड खुलवाया

तत्कालीन सांसद भुवनेश चतुर्वेदी से आग्रह करने पर उन्होंने सांसद कोष से 5.70 लाख की राशि देकर जेके लोन हॉस्पिटल में थैलेसीमिक डे-केयर वार्ड बनवाया। नवीन आज भी अपने घर से किसी गरीब या जरूरतमंद रोगी को पोर्टेबल बेड तथा अन्य उपकरण नि:शुल्क देते हैं। ठीक होने पर वापस किसी अन्य को दे देते हैं।

नवीन सुकून के साथ कहते हैं कि नींव में हुई इस कार्य साधना से संतोष मिलता है। आज एमबीएस अस्पताल ब्लड बैंक से 300 से अधिक थैलेसीमिक बच्चों को माह में 2 बार रक्त मिल रहा है। इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ही उनका सबसे बड़ा सम्मान है।

फैमिली फीलिंग : सेवा से मिलती खुशी

पत्नी नीता का कहना है कि जब ये जरूरतमंदों की सेवा के लिए निकलते हैं तो मन को संतोष होता है। बेहद खुशी होती है ब्लड बैंक में उनकी नि:स्वार्थ सेवा देखकर। बेटा कृशिव भी इनका जज्बा देखकर बहुत खुश रहता है। इनके सेवा भाव से प्रभावित होकर मैं भी 2006 से इनके साथ ब्लड बैंक में सेवा में हाथ बंटाने लगी। हम नेगेटिव गु्रप के थैलेसीमिक बच्चों का रिकॉर्ड अलग रखते हैं। इस मिशन को जारी रखने को पूरा परिवार संकल्पबद्ध है।

Published on: