Bijasan Mata Temple: यहां वर्षों से अखंड ज्योत जल रही है। मंदिर के मुख्य द्वार पर कंकाली माता विराजित हैं और उनके सामने भैरू बाबा का थानक है।
Navratri 2025: कोटा के सुल्तानपुर क्षेत्र से लगभग 19 किलोमीटर दूर मुंडला पंचायत के भीमपुरा गांव स्थित बीजासन माता मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी मुराद माता रानी अवश्य पूरी करती हैं। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष से भी अधिक समय पुराना है और इसका निर्माण कुन्हाड़ी राजघराने के झाला परिवार ने करवाया था। तभी से यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम निरंतर चला आ रहा है।
नवरात्र के दौरान मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां माता रानी 7 बहनों के रूप में विराजमान हैं। पूरे मन्दिर पर भव्य कांच की नक्काशी की गई है। यहां वर्षों से अखंड ज्योत जल रही है। मंदिर के मुख्य द्वार पर कंकाली माता विराजित हैं और उनके सामने भैरू बाबा का थानक है। मंदिर प्रांगण में ही लगभग 40 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ के नीचे हनुमानजी और भोलेनाथ की प्रतिमाएं स्थापित हैं, भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी सूरजमल धाकड़ और जगमोहन नागर बताते हैं कि यहां रोजाना भजन-कीर्तन होते हैं और नवरात्र में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर के रखरखाव का खर्चा पूरी तरह जनसहयोग से चलता है।
बीजासन माता के इस दरबार की महिमा केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के कई जिलों से भी बड़ी संया में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नही मिलती है। साथ ही यहां मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु भंडारा करते हैं।
सुल्तानपुर नगर से बीजासन माता मंदिर तक पदयात्रा निकालने की परंपरा रही है। यह यात्रा कई वर्षों तक माता के भक्त नगरवासी घनश्याम खंडेलवाल के नेतृत्व में निकाली जाती थी। उनके निधन के बाद अब उनके पुत्र नितिन खंडेलवाल इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार 27 सितंबर को 23वीं पदयात्रा रवाना होगी।