Nuclear Power Reactor News : भारत के स्वदेशी तकनीक से निर्मित चौथे परमाणु ऊर्जा रिएक्टर में बुधवार रात को हाइड्रो टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब हॉट कंडीशनिंग प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद छह से आठ माह में बिजली उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगा। जिसके बाद देश में परमाणु ऊर्जा 10 हजार 180 मेगावाट क्षमता की हो जाएगी। इससे राजस्थान को आधी बिजली मिलेगी। इस बिजली का उत्पादन सस्ता होगा।
Nuclear Power Reactor News : भारत के स्वदेशी तकनीक से निर्मित चौथे परमाणु ऊर्जा रिएक्टर में बुधवार रात को हाइड्रो टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब राजस्थान परमाणु विद्युत परियोजना की इकाई-8 की हॉट कंडीशनिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। घरेलू तकनीक से निर्मित इस परियोजना का यह रिएक्टर अगले छह से आठ माह में बिजली उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगा। इकाई 7 व 8 के केंद्र निदेशक सुब्रतदास ने बताया कि हाइड्रो लीक टेस्ट की सफलता एक उपलब्धि है। 700-700 मेगावाट की परियोजना की इकाई-7 ने 20 सितंबर 2024 को परमाणु बिजली उत्पादन शुरू करने की तैयारी के उस पड़ाव को पार कर लिया था जिसे तकनीकी भाषा में क्रिटिकलिटी कहा जाता है। इकाई सात नियंत्रित परमाणु विखंडन की प्रक्रिया की शुरुआती अवस्था से गुजर कर जल्द ही बिजली उत्पादन शुरू कर ग्रिड से जुड़ जाएगा।
हाइड्रो टेस्ट में हाईप्रेशर कर पाइप लाइन में भारी पानी को उतने प्रेशर पर टेस्ट किया जाता है, जितने पर इन्हें कार्य करना है। भारी पानी का रिसाव न हो इसलिए यह टेस्ट न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए जरूरी होता है। देश में सबसे अधिक भारी पानी दाबित परमाणु रिएक्टर है।
रावतभाटा के इस भारी जल रिएक्टर का विकास परमाणु ऊर्जा विभाग ने किया है। भारी जल रिएक्टर का मुख्य सिद्धांत है कि इसमें भारी जल (ड्यूटेरियम ऑक्साइड) का उपयोग मॉडरेटर और कूलेंट के रूप में किया जाता है, जो न्यूट्रॉनों को धीमा करके परमाणु विखंडन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। यह प्रक्रिया स्थायी रूप से ऊर्जा उत्पादन को सुनिश्चित करती है। यह स्वदेशी परमाणु तकनीक की एक मिसाल है।
परमाणु ऊर्जा को एक स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत माना जाता है। परमाणु संयंत्रों से विद्युत उत्पादन के दौरान ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बहुत कम होता है। परमाणु ऊर्जा संयंत्र एक बार चालू हो जाने के बाद लंबे समय तक बिना प्रमुख रखरखाव के बिजली उत्पादन कर सकते हैं। इससे उत्पादन सस्ता पड़ता है। रावतभाटा जैसे परमाणु ऊर्जा संयंत्र देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। इस संयंत्र से बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड की क्षमता बढ़ेगी।
परियोजना शुरू होने के बाद देश में परमाणु ऊर्जा 10 हजार 180 मेगावाट क्षमता की हो जाएगी। इससे राजस्थान को आधी बिजली मिलेगी।