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जीएसटी ने बढ़ाई इन लोगों की अहमियत

दि इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट ऑफ इंडिया के कोटा चैप्टर की हुई कार्यशाला में कर विशेषज्ञों ने जीएसटी संशोधनों के बारे में जानकारी दी।
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Updated: 17 Dec 2017, 7:49 PM IST
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वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के तात्कालिक संशोधनों को लेकर शनिवार बसंत बिहार स्थित सीएमए भवन एक दिवसीय कार्यशाला हुई। दि इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट ऑफ इंडिया के कोटा चैप्टर की ओर से हुई इस कार्यशाला में कर विशेषज्ञों ने जीएसटी लागू होने से लेकर अब तक हुए संशोधनों के बारे में जानकारी दी। मुख्य वक्ता रहे सीएमए विवेक लड्ढा ने कम्पोजिशन, इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रावधान, बिल्डर्स, करयोग्य, संयुक्त सप्लाई के प्रावधानों की जानकारी दी।मुख्य अतिथि रहे केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग के आयुक्त नरेश बुंदेल ने जीएसटी के संशोधित प्रावधानों, जीएसटी काउंसिल द्वारा विभिन्न उत्पादों की टैक्स स्लेब में दी गई रियायतों के बारे में जानकारी दी।

संशोधन के सुझाव दिए : अध्यक्षता कर रहे दि एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल ने जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार, उद्योग में आई परेशानियों का जिक्र किया, संशोधन के सुझाव दिए। कोटा चैप्टर के चेयरमैन एस.एन. मित्तल ने कहा कि अब कर विभागों के साथ ही टैक्स एडवाइजर्स, एकाउंटेंट्स की भूमिका भी बढ़ गई है। विशिष्ट अतिथि रहे टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राज ठाकुर, दिएसएसआई एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम भाटिया ने भी सम्बोधित किया। चैप्टर सेकेट्री जय बंसल ने संचालन किया।

दूसरे राज्य में माल भेजने पर ई-वे बिल 1 फरवरी से जरूरी : जीएसटी काउंसिल ने ई-वे बिल को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में शनिवार को हुई 24वीं बैठक में यह फैसला लिया गया। यह 1 जून 2018 से लागू होगा। हालांकि दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए इसे लागू करने की तारीख 1 फरवरी 2018 तय की है। नई व्यवस्था में 50,000 रु. से अधिक का माल भेजने के लिए ई-वे बिल जरूरी होगा। राज्य के भीतर 10 किमी दायरे में माल भेजने पर पोर्टल पर ब्योरा नहीं डालना होगा। इसके तहत 50,000 रु से अधिक का सामान ले जाने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ई-वे बिल सुविधा 15 जनवरी से परीक्षण के तौर पर उपलब्ध होगी। काउंसिल के मुताबिक ई-वे बिल की व्यवस्था से टैक्स अधिकारी रास्ते में कहीं भी सामान की चेकिंग कर सकेंगे। इससे टैक्स नियमों का उल्लंघन नहीं होगा। अक्टूबर में टैक्स वसूली में गिरावट के लिए सरकार ने नियमों का उल्लंघन बड़ी वजह बताया है। अक्टूबर में जीएसटी के तहत कुल 83,346 करोड़ रुपए सरकार को मिले, जो 1 जुलाई को इसके अमल में आने के बाद सबसे कम है।

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