Traffic Jam Relief Project: दरा घाटी में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या से जल्द ही राहत मिल सकती है। रेलवे द्वारा तैयार किया जा रहा नया अंडरपास निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिससे आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
Rajasthan Development: दरा घाटी में वर्षों से चली आ रही जाम की समस्या अब खत्म होने की कगार पर है। पुराने रेलवे अंडरपास के समीप बन रहा नया अंडरपास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके पूर्ण होते ही क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
रेलवे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए 9 मई को करीब सात घंटे का विशेष ब्लॉक लेगा। इस दौरान रेलवे ट्रैक को अस्थायी रूप से हटाकर अंडरपास के तीनों प्रीकास्ट ब्लॉकों को उनके निर्धारित स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे इंजीनियर मोनू कुमार के अनुसार, अंडरपास को अत्याधुनिक तकनीक से तीन बड़े हिस्सों में तैयार किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक की लंबाई लगभग 13 मीटर, चौड़ाई 6 मीटर और ऊंचाई 6 मीटर है। इन तीनों ब्लॉकों को आपस में जोड़कर करीब 40 मीटर लंबा अंडरपास तैयार किया जा रहा है, जो यातायात के दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
ब्लॉक अवधि के दौरान सबसे पहले मजबूत लोहे के गार्डर लगाए जाएंगे, जिनके सहारे रेलवे लाइन को सुरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद नीचे तीनों ब्लॉकों को जोड़कर अंडरपास को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल है और इसे बेहद सावधानी के साथ अंजाम दिया जाएगा। इसके लिए रेलवे की विशेषज्ञ टीम पूरी तरह मुस्तैद रहेगी।
फिलहाल दरा घाटी क्षेत्र में केवल एक ही अंडरपास होने के कारण वाहनों का भारी दबाव बना रहता है। इससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नए अंडरपास के शुरू होने के बाद यातायात का दबाव विभाजित होगा, जिससे जाम की समस्या में काफी हद तक कमी आएगी। साथ ही क्षेत्रवासियों और राहगीरों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी।
सांगोद क्षेत्र में हरिशचन्द्र सागर सिंचाई परियोजना में चल रहे निर्माण कार्यो का बुधवार को कोटा संभाग के जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता डीआर मीणा ने निरीक्षण किया। उन्होंने नहर में चल रहे कार्यो को देखा तथा कार्यो को गुणवत्तापूर्ण करवाने को लेकर स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित किया। इससे पहले उन्होंने मुख्य नहर में चल रहे कार्यो का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि गत दिनों सांगोद दौरे पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने परियोजना पर चल रहे कार्यो का निरीक्षण किया था। इस दौरान कई जगह कार्य में गुणवत्ता की कमी नजर आई।
बुधवार को सांगोद पहुंचे मुख्य अभियंता मीणा ने परियोजना में चल रहे कार्यो का निरीक्षण किया तथा संवेदक को कार्य गुणवत्तापूर्ण करने तथा गर्मी को देखते हुए तराई की समुचित व्यवस्था रखने को लेकर निर्देशित किया। उन्होंने संवेदक को तय समय पर कार्य पूर्ण करने एवं श्रमिक बढ़ाने को लेकर भी निर्देशित किया। मुख्य अभियंता मीणा ने बताया कि द्वितीय फेज में बजट घोषणा के तहत मुख्य नहर, माईनर एवं वितरिकाओं को पक्का किया जा रहा है। वर्तमान में परियोजना से 66 गांवों की 17800 हैक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के बाद टेल क्षेत्र में भी पर्याप्त पानी पहुंचेगा वहीं सीपेज भी कम होगा। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता महेन्द्र कुमार, अधिशासी अभियंता अनिल मीणा आदि मौजूद रहे।