
Mahant Devanand Maharaj Murder Case Update: महंत देवानंद महाराज की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता वकील संतोष राय की नजर चंद्रेसल मठ की करीब 750 बीघा बेशकीमती जमीन पर थी। इस जमीन को हथियाने के लिए उसने कथित रूप से ट्रस्ट का कार्यकारी अध्यक्ष बनकर महंत की हत्या की साजिश रची। वह मठ की पुरानी कार्यकारिणी का स्वयंभू कार्यवाहक अध्यक्ष बनकर जमीन पर कब्जा करना चाहता था तथा वहां अपनी गोशाला स्थापित करने की योजना भी बना रहा था। इसके लिए वह चंदा भी एकत्रित कर रहा था। पुलिस की पूछताछ में संतोष राय ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। ट्रस्ट के गठन को लेकर उसका महंत से विवाद भी चल रहा था, जिसके चलते उसने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी संतोष कुमार राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। वह जयपुर और कोटा दोनों जगह रहता था। उसकी पत्नी एक विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव है। वह पिछले छह-सात वर्षों से मठ में लगातार आता-जाता था और ट्रस्ट के सदस्यों से भी उसका संपर्क था।
जांच के अनुसार, घटना से पहले संतोष ने पैर की सर्जरी का बहाना बनाकर जयपुर के अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। पुलिस से संपर्क के दौरान भी उसने खुद को अस्पताल में बताया, लेकिन बाद में पूछताछ के लिए कोटा पहुंच गया। पुलिस को मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स की जांच में एक जून को उसकी लोकेशन चंद्रेसल मठ के आसपास मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उसी दिन उसने आरोपियों से मठ की रेकी करवाई थी।
वारदात की रात पूजा कर लौट रहे राजू पंडित ने पुलिस को बताया कि उसने दो मोटरसाइकिलों पर कुछ युवकों को तेज गति से जाते देखा, जिनमें से एक ने लाल रंग की बनियान पहन रखी थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच में इसी हुलिए से मेल खाते युवक बाइक पर नजर आए। फुटेज में बाइकें नॉर्दर्न बाइपास, गुड़ला, गामछ, पाटन चौराहा, कुन्हाड़ी, बैराज और किशोरपुरा होते हुए उद्योग नगर क्षेत्र की ओर जाती दिखीं। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के लिए दी गई सुपारी की राशि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए भेजी गई थी।
वारदात के बाद आरोपी कोटा से जयपुर और फिर दिल्ली होते हुए महाराष्ट्र की ओर भागे। मुख्य आरोपी आदित्य वर्मा और उसके साथी ट्रेन से महाराष्ट्र जा रहे थे। राजस्थान पुलिस ने जीआरपी, आरपीएफ और महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई कर उन्हें डिटेन किया।
यह पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर था, जिसमें घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी नहीं था और शुरुआती दौर में सुराग सीमित थे। पुलिस टीम ने कई बार घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया। सिविल ड्रेस में जानकारी जुटाई और साइबर सेल, डीएसटी, एसआइटी तथा थाना पुलिस ने मिलकर जांच आगे बढ़ाई। तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर मामले का खुलासा किया गया।
तेजस्वनी गौतम, एसपी, कोटा सिटी
आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के बाद जांच को भटकाने के लिए कई स्तर पर तैयारी की थी, लेकिन तकनीकी साक्ष्य और लगातार फील्ड वर्क के कारण उनकी साजिश बेनकाब हो गई। पुलिस टीम ने लगातार कई दिन तक मेहनत की और एक चुनौतीपूर्ण ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझा दी। अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथों से बच नहीं सकता।
सुभाष मिश्रा, एडिशनल एसपी सिटी