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H1B Visa: ट्रंप के खिलाफ हुए अमरीकी कारोबारी, नियम बदलने पर जताया विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच-1बी वीजा नियमों में जो बदलाव करने का फैसला लिया हैं। उससे अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनीयों के टॉप सीईओ ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है।
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H1B Visa: ट्रंप के खिलाफ हुए अमरीकी कारोबारी, नियम बदलने पर जताया विरोध

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प ने एच-1बी वीजा नियमों में जो बदलाव करने का फैसला लिया हैं। उससे अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनीयों के टॉप सीईओ ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। अमेरिका में एप्पल , जेपी मॉर्गन और पेप्सिको जैसी कंपनियों के 59 कंपनियों के सीईओज ने इस मामले से जुड़ा एक पत्र लिखा है। पत्र में टॉप बिजनस लीडर्स ने बताया है कि कैसे ये बदलाव अमेरिका की आर्थिक वृद्धि की दर को कमजोर कर सकते हैं।

ट्रम्प के फैसले के खिलाफ बड़ी कंपनीयों के सीईओ
पत्र बुधवार को बिजनस राउंड टेबल नाम के संगठन ने भेजा। यह वॉशिंगटन का एक ग्रुप है जिसमें यूएस के प्रमुख कार्यकारी लोग मौजूद हैं। पत्र में प्रमुखता से हाइ स्किल इमिग्रेशन में हुए बदलावों को उठाया गया है। सीईओ मुताबिक नए नियमों के चलते अमेरिका के आर्थिक नीति में अस्थिरता बढ़ेगी। अगर H-1B VISA में बदलाव होतें है तो एच-1 बी वीजा पर काम करने वाले पांच लाख भारतीय अपने भविष्य को लेकर आशंकाओं में घिर गए हैं।

सीईओ ने लिखा पत्र
इन सीईओ ने लिखा है कि हम मानते हैं कि ऐसे बदलावों को करने से बचना चाहिए जिसकी वजह से यूएस में रह रहे हजारों हुनरमंद कर्मचारियों और कानून का पालन कर रहे लोगों को परेशानी हो। इसका गहरा असर अमेरिकी प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ता है। पत्र में स्कील्ड फॉरन वर्कर्स के आवेदनों पर जिस तरीके का रवैया अपनाया जा रहा है उसपर भी सवाल उठाए हैं।

क्या है H-1B वीजा?
अमेरिका के इमिग्रेशन ऐंड नैशनलिटी ऐक्ट के सेक्शन 101(a)(15)(H) के तहत H-1B वीजा जारी किया जाता है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेषज्ञता श्रेणी में किसी विदेशी कामगार को वीजा देती हैं। इस वीजा को हासिल करने के लिए अभ्यर्थी को कम-से-कम ग्रैजुएट होना जरूरी है।

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Published on:
25 Aug 2018 09:19 am