
नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में भारतीय कारोबारियों का विलफुल डिफॉल्टर होना एक फैशन सा बन गया है। विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे कारोबारियों ने पहले तो बैकों से मोटा कर्ज लिया फिर अपने आपको विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया। वहीं अनिल अंबानी की बात करें तो वे हालांकि बैंकों का कर्ज धीरे-धीरे चुका रहे है, लेकिन वो भी इस लिस्ट में शामिल चुके हैं। अब इस कड़ी में नया नाम जुड़ गया है, यशोवर्धन बिड़ला ( Yashovardhan Birla ) का। बिड़ला ग्रुप के इस करोड़पति कारोबारी को हमेशा से ही अपने लैविश लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है। लेकिन अब यूको बैंक ने इन्हें भी विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। आपको बता दें कि यशोवर्धन को बैंक के करीब 68 करोड़ रुपए चुकाने थे। यशोवर्धन बिड़ला बिड़ला सूर्या लिमिटेड ( Birla Surya Limited ) के निदेशक होने के साथ यश बिड़ला समूह के चेयरमैन भी हैं।
आखिर क्यों की यूको बैंक ने कार्रवाई
यूको बैंक द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना में यशोवर्धन बिड़ला की तस्वीर भी प्रकाशित की गई है। बैंक ने कहा कि खाते को तीन जून 2019 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति ( एनपीए ) घोषित किया गया। नोटिस में बैंक ने कहा, "बिड़ला सूर्या लिमिटेड को मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित मफतलाल सेंटर में हमारी प्रमुख कॉरपोरेट शाखा से मल्टी क्रिस्टेलाइन सोलर फोटोवोल्टेक सेल्स बनाने के लिए सिर्फ फंड आधारित सुविधाओं के साथ 100 करोड़ रुपए की साख सीमा की मंजूरी दी गई थी। एनपीए में मौजूदा 67.65 करोड़ रुपए का बकाया कर्ज और बिना चुकता किया गया ब्याज शामिल है।" बैंक ने कहा कि कोलकाता स्थित बैंक द्वारा ऋणकर्ता को कई नोटिस दिए जाने के बावजूद उसने बकाया नहीं चुकाया।
जानिए कौन हैं यश बिड़ला
यश बिड़ला यशोवर्धन बिड़ला ग्रुप के चेयरमेन हैं। उनका समूह का मशीन टूल्स, इंजन पाइप्स, इंफोटक,ट्रेवल, स्टील समेत कई क्षेत्रों में कारोबार है। उनके पिता अशोक बिड़ला भी देश के नामी उद्योगपति थे, जिनका निधन विमान हादसे में हो गया था। यश मुंबई में गोपी बिड़ला स्कूल और अशोक बिड़ला अस्पताल भी चलाते हैं। उनका सुजाता बिड़ला चैरिटी ट्रस्ट भी है। यश बिड़ला के ग्रुप में तीन हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।
आजादी की लड़ाई में की है ग्रुप ने मदद
बिड़ला ग्रुप या यूं कहें कि देश के सबसे पुराने औद्योगिक घरानों में से एक बिड़ला घराने ने देश की आजादी में अहम योगदान दिया है। उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए देश की आजादी की लड़ाई लड़ रहे नेताओं और संगठनों को धन मुहैया कराया है। खास बात ये है कि जीडी बिड़ला की महात्मा गांधी से काफी अच्छी दोस्ती थी। महात्मा गांधी की एक आवाज पर जीड़ी बिड़ला देश की आर्थिक मदद को खड़े हो जाते थे।
जीडी बिड़ला के तत्वाधान में हुई थी यूको की स्थापना
यूको बैंक की स्थापना 1943 में हुई थी। खास बात तो ये है कि जीडी बिड़ला के तत्वाधान में ही इस बैंक को स्थापित किया गया था। आज ताज्जुब की बात यही है कि उसी परिवार के सदस्य को बैंक ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। आपको बता दें कि जीडी बिड़ला यशोवर्धन बिड़ला के परदादा रामेश्वर दास बिड़ला के भाई थे।
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