Budget 2026 Smartphone Price India: बजट 2026 स्मार्टफोन की कीमतों को कैसे प्रभावित करेगा? AI फोन, चिप लागत और मेक इन इंडिया का आपके मोबाइल बजट पर असर जानिए।
Budget 2026 Smartphone Price India: कल यानी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी। इस बजट पर न सिर्फ टैक्सपेयर्स, बल्कि करोड़ों स्मार्टफोन यूज़र्स की भी नजरें टिकी हैं। सवाल अहम है क्या बजट के बाद नया स्मार्टफोन खरीदना महंगा पड़ेगा या सरकार और इंडस्ट्री को मिलने वाली राहत का फायदा सीधे यूजर्स तक पहुंचेगा?
इस बार का बजट सिर्फ आय-व्यय के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय आ रहा है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेज़ी से बढ़ता इस्तेमाल और वैश्विक स्तर पर कंपोनेंट लागत में उतार-चढ़ाव, दोनों ही स्मार्टफोन इंडस्ट्री को प्रभावित कर रहे हैं।
हाल के महीनों में स्मार्टफोन बाजार में AI-Enabled फीचर्स को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। कंपनियां अपने डिवाइस को ज्यादा स्मार्ट और पावरफुल बनाने पर जोर दे रही हैं। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI से जुड़े हार्डवेयर की बढ़ती मांग के चलते मेमोरी चिप्स और अन्य अहम कंपोनेंट्स की लागत पर दबाव बना हुआ है।
जानकारों के मुताबिक, ग्लोबल सप्लाई चेन अभी पूरी तरह संकट में नहीं है, लेकिन AI से जुड़ी मांग के कारण कुछ कंपोनेंट्स महंगे हुए हैं। ऐसे में स्मार्टफोन निर्माताओं की लागत बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
कुछ चीनी ब्रांड्स ने फिलहाल कीमतें स्थिर रखने की कोशिश की है, जबकि बाजार से जुड़े संकेत बताते हैं कि कुछ बड़ी कंपनियों ने हाल के महीनों में चुनिंदा मॉडल्स की कीमतों में बदलाव किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लागत का दबाव बना रहा और नीति स्तर पर राहत नहीं मिली, तो आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं।
रियलमी के पूर्व प्रमुख और वर्तमान में AI+ स्मार्टफोन्स के सीईओ माधव सेठ का मानना है कि भारत अब उस चरण में पहुंच रहा है, जहां केवल फोन असेंबली से आगे बढ़ने की जरूरत है।
उनके अनुसार, बजट में ऐसा रोडमैप होना चाहिए जिससे भारत में कैमरा मॉड्यूल, पीसीबी (PCB) और बैटरी जैसे अहम कंपोनेंट्स का डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग संभव हो सके। फिलहाल इन पुर्जों के लिए देश काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
इंडस्ट्री का मानना है कि यदि बजट में इन कंपोनेंट्स पर टैक्स या कस्टम ड्यूटी में राहत दी जाती है, तो इससे स्मार्टफोन की लागत को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।
स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि पूरे टेक और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की निगाहें भी बजट पर टिकी हैं।
Zebronics के राजेश दोषी के मुताबिक, अगर इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव या राहत मिलती है, तो लोगों के पास खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा बचेगा, जिससे बाजार में मांग बढ़ सकती है।
TECNO Mobile के अरिजीत तलपात्रा का कहना है कि स्मार्टफोन आज लग्जरी नहीं, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन चुका है। बजट नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जिससे तकनीक शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और कस्बाई इलाकों तक भी सुलभ हो सके।
इंडस्ट्री का एक वर्ग मेक इन इंडिया 2.0 के तहत PLI स्कीम के विस्तार की उम्मीद भी कर रहा है, ताकि भारत सिर्फ उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सके।
अगर मौजूदा परिस्थितियों को जोड़कर देखा जाए, तो तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
वैश्विक दबाव: AI से जुड़े कंपोनेंट्स और मेमोरी चिप्स की लागत में बढ़ोतरी का असर कीमतों पर पड़ सकता है।
सरकारी कदम: यदि बजट में कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी में कटौती या मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाले कदम उठाए जाते हैं, तो इससे घरेलू स्तर पर बने स्मार्टफोन्स की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
खर्च करने की क्षमता: इनकम टैक्स में संभावित राहत से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ सकती है, जिससे महंगे फोन भी अपेक्षाकृत किफायती महसूस हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, बजट 2026 यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा या फिर नीति स्तर पर मिली राहत का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। अब देखना यह होगा कि बजट के बाद आपके स्मार्टफोन की स्क्रीन पर प्राइस ड्रॉप का नोटिफिकेशन आता है या कीमतों की समीक्षा की खबर।