
RBI Digital Fraud Compensation: डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि फर्जी या धोखाधड़ी वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन में जिन ग्राहकों का पैसा चला गया है, उन्हें अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए RBI जल्द ही एक अलग फ्रेमवर्क लागू करेगा।
RBI के मुताबिक, यह मुआवजा उन मामलों में भी दिया जाएगा, जहां ग्राहक ने धोखाधड़ी के दौरान OTP साझा कर दिया हो, बशर्ते यह साबित हो कि ग्राहक की ओर से कोई जानबूझकर की गई दुर्भावना नहीं थी।
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि किसी भी ग्राहक को यह मुआवजा सिर्फ एक बार ही मिलेगा। यदि यह पाया जाता है कि ग्राहक ने जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया है या किसी साजिश में शामिल रहा है, तो वह इस मुआवजे का हकदार नहीं होगा।
RBI ने बताया कि मुआवजे की राशि डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड से दी जाएगी, जिसकी कुल राशि करीब 85,000 करोड़ रुपये है। इस फंड का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में ग्राहकों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाना है।
RBI के अनुसार, देश में डिजिटल फ्रॉड के अधिकांश मामलों में ठगी की रकम 50,000 रुपये से कम होती है। ऐसे में 25,000 रुपये तक के मुआवजे का यह प्रावधान बड़ी संख्या में पीड़ित ग्राहकों को राहत दे सकता है। हालांकि, यदि किसी मामले में नुकसान इससे अधिक है, तब भी मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये ही रहेगी।
RBI ने यह भी साफ किया है कि इस मुआवजा व्यवस्था को लागू करने के लिए जल्द ही एक विस्तृत फ्रेमवर्क जारी किया जाएगा, जिसमें प्रक्रिया और शर्तों की पूरी जानकारी दी जाएगी।
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच RBI का यह कदम डिजिटल फ्रॉड से प्रभावित ग्राहकों के लिए एक अहम राहत माना जा रहा है।