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Animal Senses Earthquake: बड़े कान नहीं, पैर बनते हैं अलार्म…भूकंप से पहले यह जानवर पैरों से महसूस कर लेता है हलचल

Animal Senses Earthquake: भूकंप से पहले कई जानवर धरती की बेहद हल्की कंपन को इंसानों से पहले महसूस कर लेते हैं। वैज्ञानिक शोध मानते हैं कि बड़े कान नहीं, बल्कि इनके संवेदनशील पैर अलार्म की तरह काम करते हैं और खतरे का संकेत दे देते हैं।

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Feb 03, 2026
Animal behavior before Natural earthquake warning signs, Elephant not ears but legs sense earthquake, earthquake|फोटो सोर्स – Freepik

Animal Senses Earthquake: भूकंप आने से पहले कई जानवरों का व्यवहार अचानक बदल जाता है, जिसे इंसान सदियों से महसूस करता आया है। Science On a Sphere भी मानती हैं कि कुछ जानवर इंसानों से पहले धरती की बेहद हल्की कंपन और तरंगों को पैरों के जरिए महसूस कर लेते हैं। खासतौर पर हाथी, जो सिर्फ अपने बड़े कानों से नहीं बल्कि पूरे शरीर खासकर पैरों से धरती की हलचल पकड़ लेते हैं। यही संवेदनशीलता उन्हें दूर के खतरे, तूफान और भूकंप जैसे संकेत पहले पहचानने में मदद करती है।

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भूकंप से पहले हाथी कैसे महसूस कर लेते हैं जमीन की हलचल?

जब भी भूकंप आता है, अक्सर यह कहा जाता है कि कुछ जानवर पहले ही बेचैन हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाथी उन गिने-चुने जीवों में शामिल हैं जो धरती की बेहद हल्की कंपन को भी समय रहते महसूस कर लेते हैं? हैरानी की बात यह है कि इसके लिए उन्हें अपने विशाल कानों की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उनके पैर ही उनका अलार्म सिस्टम बन जाते हैं।

कान नहीं, जमीन से सुनते हैं हाथी

हाथी ऐसी आवाजें पैदा करते हैं जिन्हें इंसान सुन ही नहीं सकता। इन्हें इन्फ्रासाउंड कहा जाता है। ये बहुत कम फ्रीक्वेंसी की गहरी गूंज होती है, जो हवा में कई किलोमीटर तक और जमीन के भीतर उससे भी ज्यादा दूर तक फैल सकती है।जब कोई हाथी ऐसी आवाज निकालता है, तो वह सिर्फ हवा में नहीं जाती, बल्कि धरती के अंदर कंपन (सीस्मिक वाइब्रेशन) के रूप में फैलती है। दूसरे हाथी इन कंपन को अपने पैरों के जरिये महसूस कर लेते हैं।

हाथी के पैरों में छिपा है यह कमाल

हाथी के पैर सिर्फ भारी शरीर को संभालने के लिए नहीं बने हैं। उनके तलवों के नीचे मोटी त्वचा के अंदर चर्बीदार परत (फैट पैड) होती है, जो कंपन को सोखने और बढ़ाने का काम करती है।इसी परत में मौजूद होते हैं पेसिनियन कॉर्पसकल्स, जो बेहद संवेदनशील सेंसरी सेल्स होते हैं। ये हल्के से हल्के दबाव और कंपन को भी तुरंत पकड़ लेते हैं। यही कारण है कि हाथी दूर हो रही गतिविधियों को बिना देखे ही “महसूस” कर लेते हैं।

इस क्षमता से हाथियों को क्या फायदा होता है?

दूर-दराज तक संवाद

घने जंगलों या खुले मैदानों में जहां आंखों से देख पाना मुश्किल होता है, वहां हाथी ज़मीन के ज़रिये एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखते हैं।

खतरे की पहले चेतावनी

शिकारी जानवर, इंसान या दूसरे झुंड हाथी इन्हें पास आने से काफी पहले भांप लेते हैं और सतर्क हो जाते हैं।

मौसम और पानी की पहचान

दूर हो रही बारिश या तूफान से पैदा होने वाली कंपन हाथियों को पानी के स्रोत तक पहुंचने में मदद करती है, खासकर सूखे इलाकों में।वैज्ञानिक अध्ययनों में देखा गया है कि जब हाथी किसी खास कंपन को महसूस करते हैं, तो वे कभी अचानक रुक जाते हैं, कभी झुंड में इकट्ठा होते हैं या फिर कंपन की दिशा के अनुसार आगे या पीछे बढ़ जाते हैं।

इंसानी शोर बन रहा है खतरा

आधुनिक समय में यह प्राकृतिक सिस्टम खतरे में है। खनन, भारी मशीनें, सड़क यातायात और निर्माण कार्य जमीन में ऐसी कंपन पैदा करते हैं, जो हाथियों के लिए भ्रम की स्थिति बना देते हैं।शोधकर्ताओं का मानना है कि इन कृत्रिम कंपन की वजह से हाथी तनाव में आ जाते हैं, रास्ता भटक सकते हैं और कई बार इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ता है।

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Published on:
03 Feb 2026 01:19 pm
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