Cow Milk for Babies: 1 साल से छोटे बच्चों को गाय का दूध पिलाना खतरनाक हो सकता है। जानें क्यों डॉक्टर केवल मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क की सलाह देते हैं और गाय का दूध शिशु की किडनी व सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है।
Cow Milk for Babies: भारत में गाय के दूध को बेस्ट माना जाता है।आज भी कई माता पिता अपने छोटे बच्चों को गाय का दूध पिलाते है। खासकर तब जब बच्चा 1 साल से छोटा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके बच्चे की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है? तो आइए जानते हैं कैसे।
दरअसल, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवी मलिक के अनुसार, एक साल से कम उम्र के बच्चों को कभी भी गाय का दूध नहीं पिलाना चाहिए, क्योंकि यह उनकी किडनी और समग्र स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
डॉ. मलिक बताते हैं कि विश्वस्तरीय संस्थाएं जैसे इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और यूनिसेफ सभी का यही मानना है कि शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। यह बच्चे के विकास के लिए सबसे उत्तम और प्राकृतिक पोषण है।
गाय के दूध में वे पोषक तत्व नहीं होते जो छोटे बच्चों के लिए बेहद ज़रूरी हैं, जैसे – आयरन, विटामिन C, विटामिन E और आवश्यक फैटी एसिड्स। इसके उलट, इसमें प्रोटीन, सोडियम और पोटैशियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसे एक साल से छोटे बच्चे का नाज़ुक पाचन तंत्र और किडनी संभाल नहीं पाती।
जब शिशु को गाय का दूध दिया जाता है, तो उसमें मौजूद अधिक प्रोटीन और मिनरल्स उसकी किडनी पर दबाव डालते हैं। लंबे समय तक यह आदत बच्चे के अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है और आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है।
डॉ. मलिक के अनुसार, कई बार गाय का दूध छोटे बच्चों में स्किन एलर्जी का कारण बनता है। इस स्थिति को Cow Milk Protein Intolerance (CMPI) कहा जाता है। इसमें बच्चे को बार-बार एलर्जी होती है, पाचन में समस्या आती है और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव (Intestinal bleeding) भी हो सकता है। ऐसे बच्चों के मल (स्टूल) में खून आने जैसी स्थिति बन सकती है, जो बेहद खतरनाक है।
एक साल से छोटे बच्चों को केवल मां का दूध दें। अगर किसी कारणवश मां का दूध उपलब्ध न हो, तो डॉक्टर की सलाह पर ही शिशु के लिए फॉर्मूला मिल्क का उपयोग करें। गाय का दूध कम से कम तब तक न दें जब तक बच्चा 12 महीने का न हो जाए।एक साल के बाद भी धीरे-धीरे गाय का दूध शुरू करें और बच्चे की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें।