Dark Showering Trend: सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘डार्क शॉवरिंग’ एक नए वेलनेस ट्रेंड के तौर पर तेजी से चर्चा में है, जहां लाइट बंद करके नहाने को मानसिक सुकून से जोड़ा जा रहा है।कहा जा रहा है कि अंधेरे में नहाने से दिमाग को बाहरी शोर-शराबे से राहत मिलती है, जिससे तनाव घटता है और शरीर गहराई से रिलैक्स महसूस करता है।
Dark Showering Trend: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग ऐसे छोटे-छोटे तरीकों की तलाश में रहते हैं, जो उन्हें मानसिक शांति दे सकें। वेलनेस ट्रेंड्स इसी तलाश का नतीजा होते हैं। कभी आइस बाथ चर्चा में होता है, तो कभी सुबह-सुबह ग्राउंडिंग रिचुअल्स। अब इसी कड़ी में एक नया ट्रेंड सामने आया है डार्क शॉवरिंग। यानी हल्की रोशनी या पूरी तरह अंधेरे में नहाना।पहली नजर में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसे अपनाने वालों का कहना है कि इससे शरीर और दिमाग दोनों को सुकून मिलता है। यह नहाने की एक ऐसी आदत है, जो रोजमर्रा के काम को भी रिलैक्सेशन के अनुभव में बदल सकती है।
डार्क शॉवरिंग का मतलब सिर्फ बाथरूम की लाइट बंद करना नहीं है। इसे एक सेंसरी रिसेट के तौर पर देखा जाता है। जब नहाते समय तेज रोशनी नहीं होती, तो आंखों को आराम मिलता है और ध्यान अपने आप बाकी इंद्रियों पर चला जाता है।पानी की गर्म धार, उसकी गिरने की आवाज, साबुन या शैम्पू की खुशबू ये सारी चीजें अंधेरे में ज्यादागहराई से महसूस होती हैं। यह अनुभव कई लोगों के लिए किसी छोटे मेडिटेशन जैसा बन जाता है।
रात के समय तेज रोशनी हमारे शरीर की नेचुरल नींद की प्रक्रिया में रुकावट डाल सकती है। अंधेरा शरीर को यह संकेत देता है कि अब आराम करने का समय है। डार्क शॉवरिंग इसी सिद्धांत पर काम करता है।जब कोई व्यक्ति सोने से पहले अंधेरे या बहुत धीमी रोशनी में नहाता है, तो दिमाग धीरे-धीरे एक्टिव मोड से बाहर आने लगता है। इससे नींद के लिए शरीर को तैयार होने में मदद मिल सकती है। यह आदत खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जिन्हें देर तक नींद नहीं आती या जो रात में बार-बार जाग जाते हैं।
डार्क शॉवरिंग सिर्फ नींद ही नहीं, बल्कि तनाव कम करने में भी मददगार मानी जाती है। जब आंखों को देखने के लिए ज्यादाकुछ नहीं मिलता, तो दिमाग की भागदौड़ थोड़ी थम जाती है।पानी की आवाज और उसकी गर्माहट नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद कर सकती है। इससे रेसिंग थॉट्स कम होते हैं और मन को थोड़ी स्थिरता मिलती है। कई लोग इसे दिनभर के तनाव को “वॉश आउट” करने का तरीका मानते हैं।
हालांकि यह ट्रेंड ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन सभी के लिए नहीं। जिन लोगों को चक्कर आने, बैलेंस की समस्या या नजर से जुड़ी दिक्कतें हैं, उन्हें पूरी तरह अंधेरे में नहाने से बचना चाहिए।ऐसे में हल्की डिम लाइट या नाइट लैंप का इस्तेमाल बेहतर विकल्प हो सकता है, ताकि सुरक्षा बनी रहे और रोशनी भी कम हो।